July 8, 2026

पत्नी को पति की हैसियत के अनुसार जीवन जीने का अधिकार: उत्तराखंड हाईकोर्ट

भरण-पोषण मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पत्नी को पति की हैसियत के अनुसार जीवन जीने का अधिकार।

Nainital/Alive News: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भरण-पोषण (गुजाराभत्ता) से जुड़े एक मामले में अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि पत्नी को सम्मान और गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार है। साथ ही वह अपने पति की आर्थिक स्थिति के अनुसार जीवन का आनंद लेने की भी हकदार है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पत्नी का आर्थिक रूप से भरण-पोषण करना पति की कानूनी जिम्मेदारी है।

मामला हल्द्वानी निवासी भारतीय सेना के एक जवान से जुड़ा है। जवान ने परिवार न्यायालय के उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उसे अलग रह रही पत्नी को अंतरिम भरण-पोषण के रूप में हर महीने दस हजार रुपये देने का निर्देश दिया गया था।

याचिका में जवान ने बताया कि वह फिलहाल हाई-रिस्क क्षेत्र में तैनात है और उसकी मासिक सैलरी लगभग 92 हजार रुपये है। हालांकि भविष्य निधि (PF), बीमा और लोन की किस्तों जैसी कटौतियों के बाद उसके पास कम राशि बचती है। उसने यह भी कहा कि हाई-रिस्क क्षेत्र से स्थानांतरण के बाद उसका वेतन घटकर करीब 72 हजार रुपये रह जाएगा।

जवान ने अदालत को यह भी बताया कि उसकी मां और भाई की आर्थिक जिम्मेदारी भी उसी पर है और परिवार न्यायालय ने इन तथ्यों पर पर्याप्त विचार नहीं किया।

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने परिवार न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता की आय को देखते हुए दस हजार रुपये प्रति माह का अंतरिम भरण-पोषण न तो अधिक है और न ही मनमाना।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पत्नी को पति की आर्थिक स्थिति के अनुरूप जीवन जीने का अधिकार है और भरण-पोषण की मांग करना उसका वैधानिक अधिकार है। इसलिए परिवार न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता।