September 11, 2026

Editorial

जिंदगी ना मिलेगी दोबारा, जिंदादिली से जीने की सीखें कला

जीवन के मोल का अंदाजा केवल एक बात से लगा लीजिए कि, एक मृत शरीर है, दुनिया की सारी दौलत खर्च करके, अत्याधुनिक अस्पताल, सरकारें, धार्मिक कर्मकांड सब मिलकर कोशिश कर लें, पूरे ब्रह्मांड की ताकत लगाकर भी मृत शरीर में एक सेकंड के लिए भी जान नहीं ला सकते। मतलब जीवन अनमोल है, उसे […]

चुनाव खत्म, ‘वसूली’ शुरू? तेल का खेल और जनता की जेब पर डाका!

ये देश में क्या चल रहा है, अरे भाई करना क्या चाहते हो। कभी युवाओं से पकौड़े तलवाते हो तो कभी पकौड़े नही खाने की सलाह देते हो। आखिरकार देश के लोगों से कराना क्या चाहते हो। एक बात और सुनिए! अगर आज आप कढ़ाई में छनते हुए तेल के पकौड़े खा रहे हैं, तो […]

मज़हब, मानवता और वैचारिक संघर्ष का विमर्श: ‘मज़हब ही तो सिखाता है आपस में बैर रखना’

भारतीय समाज में धर्म, मज़हब और मानवता के संबंधों को लेकर सदियों से विचार-विमर्श चलता रहा है, किंतु समकालीन समय में यह बहस और अधिक तीव्र और प्रासंगिक हो गई है। इसी संवेदनशील और जटिल विषय को केंद्र में रखकर लेखक डॉ. राकेश कुमार आर्य की पुस्तक ‘मज़हब ही तो सिखाता है आपस में बैर रखना’ एक वैचारिक हस्तक्षेप […]

केवल जागरूक और सतर्क उपभोक्ता ही सुरक्षित

आज के डिजिटल युग में आर्थिक व्यवहार या खरीदारी तो आसान हो गयी, लेकिन उसी मात्रा में धोखाधड़ी, बनावट उत्पाद, मिलावटखोरी और साइबर अपराध भी हद से ज्यादा बढ़ गए। दूसरों पर अंधा भरोसा, दिखावा, भ्रामक विज्ञापन, झूठे वादे पर विश्वास न करके अपने विवेकबुद्धि का इस्तेमाल करें, निति-नियम, कानून का पालन करें, तभी हम […]

आत्महत्या एक समस्या 

आत्महत्या ऐसी समस्या है जो न केवल मनुष्य का जीवन अंत करती है ,बल्कि अंत होता है उन मां बाप की परवरिश का, अंत होता है एक हंसते खेलते परिवार का , यहां तक कि अंत होता है समाज का जहां एक व्यक्ति इतने साल जीने के बाद भी एक ऐसा रिश्ता नहीं बना पाया […]

भारत का खाद्य और औषधि नियंत्रण — जब व्यवस्था ही जहर बन जाए तो क्या?

लेखक- प्रभजोत कौर आज भारत का जन स्वास्थ्य आपातकाल की चपेट में है। देश में 10 करोड़ से अधिक मधुमेह रोगी हैं, हृदय रोग और कैंसर की दरें लगातार बढ़ रही हैं, और बचपन का मोटापा नए खतरे के स्तर पर पहुंच चुका है। यह संकट किसी संयोग का परिणाम नहीं, बल्कि उस व्यवस्थागत गिरावट […]

मानसिक यातनाओं में परिवर्तित होने वाले मानसिक खेलों में लगातार वृद्धि

मनोविज्ञान विचारों, भावनाओं और व्यवहारों को समझने में मदद करता है, जिससे हमारा आत्मविश्वास बढ़ता है और अपनी कमजोरियों को पहचानने और सुधारने की क्षमता बढ़ती हैं। दिमागी खेलों का इस्तेमाल हमेशा दूसरे व्यक्ति की भावनाओं और कार्यों को प्रभावित एवं उन्हें नियंत्रित करने के लिए किया जाता है, जो किसी व्यक्ति को कुछ खास […]

आधुनिक जीवनशैली में हृदय विकार का खतरा चरम पर

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हृदय रोग दुनिया भर में मृत्यु का प्रमुख कारण हैं। 2022 में, अनुमानित 19.8 मिलियन लोगों की हृदय रोग से मृत्यु हुई, जो वैश्विक स्तर पर होने वाली कुल मौतों का लगभग 32 प्रतिशत हैं। इनमें से 85 प्रतिशत मौतें दिल के दौरे और स्ट्रोक के कारण हुईं। संयुक्त राज्य […]

मनुष्य का अवसरवाद बन रहा आपदा का कारण

प्रभजोत कौरउत्तर भारत के कई राज्यों में बादल फटना, भूस्खलन, सामान्य से ज्यादा बारिश और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएं आना कुछ ठीक नहीं है। पंजाब, हिमाचल, जम्मू, हरियाणा और दिल्ली के कई हिस्से इसकी चपेट में आ गए और स्थिति भयावह हो गई। आप जानते है कि यह प्राकृतिक आपदा क्यों हो रही है। ज्यादातर […]

अपने दीपक स्वयं बनो की प्रेरणा है ‘शिक्षक’

“दुनिया सुनना नहीं, देखना पसंद करती है कि आप क्या कर सकते हैं”…. ओर अपने अंदर छिपी इसी असीम शक्ति की पहचान करवाना, मैं कौन हूँ ओर क्या कुछ कर सकता हूँ इस भाव को परिणाम में बदलने के लिए प्रेरित करने की प्रेरणा है शिक्षक। आज शिक्षक दिवस है और हममें से कोई भी ऐसा […]