January 28, 2022

Editorial

देश के असली हीरो और अजेय योद्धा ‘नेताजी सुभाष बोस’

‘बिना कीमत चुकाए कुछ हासिल नहीं होता और आज़ादी की कीमत है शहादत’ आज़ाद हिंद फौज के सैनिकों को इस आह्वान के साथ ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा’ नारे के द्वारा प्रेरित करने वाले व्यक्तित्व का नाम है सुभाष बोस. जय हिंद तथा दिल्ली चलो की प्रेरणा थे सुभाष। महात्मा गांधी को […]

स्वामी विवेकानंद: चलो देश के लिए जीते हैं

हिन्दुस्थान नौजवान है, युवाशक्ति से भरा हुआ है। युवा के मन में और आंखों में सपने होते हैं, नेक इरादे होते हैं। मजबूत संकल्प शक्ति होती है, युवा पत्थर पर भी लकीर खींचने का सामर्थ्य रखते हैं। और इन्हीं युवाओं के भरोसे स्वामी विवेकानंद ने आह्वान किया था की मैं मेरी आंखों के सामने भारत […]

आज की सत्ता बापू की विरासत को वैश्विक पर्यटन का केंद्र बनाकर नष्ट करना चाहती है : राजेंद्र सिंह

Faridabad/Alive News : सर्वप्रथम आज बापू कूटी, सेवाग्राम में प्रार्थना सभा और बैठक आयोजित हुई। इस सभा में जलपुरुष डॉ राजेंद्र सिंह ने कहा कि वर्तमान में आर्थिक लोभ और सत्ता की लोलुप्ता के कारण भारत के इतिहास और विरासत के निर्माण को बदलने का प्रयास कर रहे है। इस अन्याय को हम स्वीकार नही […]

ओजन परत में छेद होने से परेशान हैं पर्यावरणविद

खेती में पानी से हरियाली, जवानी में खुशहाली आती है, यही जलवायु परिवर्तन, अनुकूलन और उन्मूलन है। व्यवस्था में छेद होने से पहले हमारे में छुद्रता आती है और यह छुद्रता यदि वैचारिक हो तो इसका अर्थ यह है कि, हमारे पतन की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। यह सुलगती सच्चाई है औैर इस […]

अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस युवाओं का दिन…

बढ़ती बेरोजगारी होना चाहिए चिंता का विषय युवा किसी भी देश की तरक्की और विकास में अहम भागीदारी निभाता है। इसमें कोई दोहराई नही है क्योंकि जो विजन, काम करने की शक्ति और कुछ नया करने का जज्बा युवाओं के पास है। वो किसी के पास नही हो सकता आज का दिन युवाओं का दिन […]

राजनीति अर्थात राज करने के लिए जो नीतियां अपनाई जाए वही तो है राजनीति

राजनीति में केवल आज राजनीतिक लोग केवल अपनी आकांक्षाओं और अपनी प्रबल इच्छाओं को पूरा करने के लिए दिन-रात प्रयासरत हैं। चुनावों के दौरान जनता के बीच में किए चुनावी वायदे जीतने के बाद हवा हवाई हो जाते हैं और जनता को उनके हालात पर छोड़ दिया जाता है। देश और समाज के लिए कुछ […]

भाग -2 : लोकतंत्र कैसे मरता है, पढ़िए

उपरोक्त शीर्षक से संबंधित लेख के दूसरे भाग का आरंभ हम, How Democracies Die, पुस्तक के लेखकों के संक्षिप्त परिचय से करना चाहेंगे। जनवरी 17,1968 में जन्में स्टिवन लेवितस्की अमेरिका के राजनीतिक वैज्ञानिक और हार्वड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं। तुलनात्मक राजनीतिक वैज्ञानिक- अनुसंधान क्षेत्र के साथ-साथ लेटिन अमेरिका और राजनैतिक पार्टियों और जिसमें पार्टी स्सिटम […]

भाग-1 : लोकतंत्र कैसे मरता है?

आज कमोबेश समूचे विश्व में लोकतांत्रिक राज-व्यवस्थाओं को बचाने के प्रयास बड़ी शिद्दत से चल रहे हैं, और इस बात पर भी गहन विचार-मंथन हो रहा कि विभिन्न देशों में डेमोक्रेसी कैसे समाप्त हो रही है ? ऐसे में हमें भी अपने देश में चल रही मौजूदा दौर की राजनैतिक -प्रवृति को समझना चाहिए या […]

हिंदी पत्रकारिता जनता और सरकार के बीच सेतु

30 मई ‘हिंदी पत्रकारिता दिवस’ देश के लिए एक गौरव का दिन है। आज विश्व में हिंदी के बढ़ते वर्चस्व व सम्मान में हिंदी पत्रकारिता का विशेष योगदान है। हिंदी पत्रकारिता की एक ऐतिहासिक व स्वर्णिम यात्रा रही है जिसमें संघर्ष, कई पड़ाव व सफलताएं भी शामिल है। स्वतंत्रता संग्राम या उसके बाद के उभरते नये भारत की […]

भाग- 3 : गोलवालकर का हिन्दू राष्ट्र व राष्ट्रीयता

GOLWALKAR’S, WE OR OUR NATIONHOO DEFINED ( 3rd Revised Edition). A Critique by SHAMSUL ISLAM.उपरोक्त पुस्तक व अन्य पुस्तकों व ग्रंथों के अध्ययन की सहायता से हम ‘गोलवाकर का हिन्दू राष्ट्र व राष्ट्रीयता शीर्षक को लेकर श्रृखंला बद्ध आलेखों की कड़ी में हम तीसरे प्रकरण की शुरुआत करने जा रहे हैं। जहां तक एम.एस.गोलवालकर [GOLWALKAR’S, […]