July 24, 2026

TMC की 21 जुलाई रैली पर कलकत्ता हाई कोर्ट सख्त, ममता और अभिषेक बनर्जी से 4 हफ्ते में मांगा हलफनामा

कलकत्ता हाई कोर्ट ने TMC की 21 जुलाई रैली से जुड़े अवमानना मामले में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी से चार सप्ताह में हलफनामा मांगा।

Kolkata/Alive News: कलकत्ता हाई कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की 21 जुलाई ‘शहीद दिवस’ रैली से जुड़े अवमानना मामले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को चार सप्ताह के भीतर अपना हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

मामला वर्ष 2018 की उस रैली से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि हाई कोर्ट के पहले से जारी आदेश के बावजूद कोलकाता की मुख्य सड़कों को अवरुद्ध किया गया था।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि वर्ष 2018 में आयोजित TMC की 21 जुलाई ‘शहीद दिवस’ रैली के दौरान अदालत के निर्देशों का पालन नहीं किया गया। रैली के कारण कोलकाता के एस्प्लेनेड इलाके की प्रमुख सड़कें पूरी तरह जाम हो गईं, जिससे आम लोगों और आपातकालीन सेवाओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। यह अवमानना याचिका अधिवक्ता श्रीकांत दत्ता ने 19 जून को दायर की थी।

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस अरिजीत बनर्जी और जस्टिस अपूर्वा सिन्हा रे की डिवीजन बेंच ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को निर्देश दिया कि वे चार सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल कर याचिका में लगाए गए आरोपों पर अपना पक्ष रखें। अदालत ने यह भी कहा कि दोनों नेताओं के जवाब के बाद याचिकाकर्ता दो सप्ताह के भीतर अपना प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल करेंगे। मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी।

क्या था 2018 का हाई कोर्ट का आदेश?

मई 2018 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ज्योतिर्मय भट्टाचार्य और जस्टिस अरिजीत बनर्जी की डिवीजन बेंच ने आदेश दिया था कि किसी भी सार्वजनिक सभा या रैली के कारण मुख्य सड़कों को पूरी तरह बंद नहीं किया जा सकता।

अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि पैदल यात्रियों और एम्बुलेंस सहित आपातकालीन वाहनों के आवागमन के लिए पर्याप्त रास्ता हर हाल में खुला रखा जाए।

क्या ममता और अभिषेक अवमानना के दोषी हैं?

फिलहाल हाई कोर्ट ने किसी को भी अवमानना का दोषी नहीं ठहराया है। अदालत ने केवल दोनों नेताओं से आरोपों पर जवाब मांगा है। मामले में अंतिम निर्णय दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद लिया जाएगा।