Prabhjot Kour/Alive News
Faridabad: कभी घुटनों का दर्द उम्र बढ़ने की निशानी माना जाता था, लेकिन अब 50 की उम्र भी इसके लिए ज्यादा नहीं रही। शहर के जिला अस्पताल में ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जो उम्र के इस पड़ाव पर ही घुटनों के तेज दर्द, चलने-फिरने में परेशानी और जोड़ के घिसाव से जूझ रहे हैं। कुछ मरीजों की स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि दवा और व्यायाम से राहत नहीं मिलने पर घुटना बदलवाने की नौबत आ रही है। डॉक्टरों के अनुसार, बढ़ता वजन, घंटों बैठे रहना, व्यायाम की कमी और घुटनों पर लगातार पड़ने वाला दबाव इस समस्या को कम उम्र में बढ़ा रहा है।बीके अस्पताल में रोजाना करीब 20 मरीज घुटनों की परेशानी लेकर पहुंच रहे हैं। जांच के बाद इनमें से करीब दो मरीजों में घुटना बदलने की जरूरत सामने आती है। अस्पताल में हर महीने करीब 10 घुटना प्रत्यारोपण किए जा रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि हर दर्द वाले मरीज को सर्जरी की जरूरत नहीं होती। शुरुआती स्थिति में दवा, व्यायाम और फिजियोथेरेपी से भी राहत मिल सकती है।
वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. रवि शंकर गौर ने बताया कि घुटनों की समस्या लेकर आने वाले मरीजों में 40 से 80 वर्ष की उम्र वालों की संख्या अधिक है। मरीज की जांच के बाद उसकी स्थिति के अनुसार इलाज तय किया जाता है। जिन मरीजों को दवा और नियमित व्यायाम से आराम मिलने की संभावना होती है, उन्हें सर्जरी की सलाह नहीं दी जाती। मरीजों को उनकी समस्या के अनुसार व्यायाम भी बताया जाता है। वजन बढ़ने से घुटनों के जोड़ पर दबाव बढ़ जाता है। इसके अलावा लंबे समय तक बैठे रहना, नियमित व्यायाम नहीं करना, गलत तरीके से सीढ़ियां चढ़ना-उतरना, पुरानी चोट और उम्र के साथ जोड़ का घिसना भी दर्द की वजह बन सकता है। कुछ लोगों में आनुवंशिक कारणों से घुटनों का घिसाव कम उम्र में ही शुरू हो जाता है।
दर्द को उम्र का असर समझकर न टालें
उनके अनुसार, घुटनों में लगातार दर्द, सूजन या चलने में परेशानी को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और उपचार से समस्या को बढ़ने से रोका जा सकता है। वजन नियंत्रित रखने, नियमित हल्का व्यायाम करने और घुटनों की मांसपेशियों को मजबूत रखने से फायदा मिल सकता है। डॉक्टर की सलाह के बिना लगातार दर्द निवारक दवाएं लेने से भी बचना चाहिए।

