Faridabad/Alive News: सेक्टर-12 टाउन पार्क में करीब ₹5.84 करोड़ की लागत से तैयार की गई अटल लाइब्रेरी उद्घाटन के महीनों बाद भी पूरी तरह शुरू नहीं हो सकी है। लाइब्रेरी भवन और आधुनिक सुविधाएं तैयार हैं, लेकिन संचालन के लिए जरूरी स्टाफ और अन्य व्यवस्थाएं पूरी नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। जून 2026 की रिपोर्ट में भी इसके शुरू नहीं होने और संचालन की जिम्मेदारी तय न होने की बात सामने आई थी।
इस लाइब्रेरी का निर्माण पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में किया गया है। इसमें ई-लाइब्रेरी, हाई-स्पीड इंटरनेट, रीडिंग हॉल, ग्रुप डिस्कशन चेंबर, ऑडियो-विजुअल और मल्टीमीडिया सुविधाओं के साथ फायर फाइटिंग सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं तैयार की गई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, यहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी एक साथ पढ़ाई कर सकते हैं।
लाइब्रेरी में कंप्यूटर लगाए गए हैं, लेकिन उन्हें संचालित करने के लिए स्टाफ की व्यवस्था नहीं हो सकी है। किताबें रखने के लिए रैक भी बनाए गए हैं, लेकिन लाइब्रेरी के संचालन के लिए किताबों और अन्य संसाधनों की व्यवस्था पूरी होना बाकी है। जून 2026 में सामने आई जानकारी के अनुसार, संचालन की जिम्मेदारी को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं थी।
लाइब्रेरी भवन की शुरुआत की कहानी भी करीब आठ साल पुरानी है। 25 दिसंबर 2018 को तत्कालीन उद्योग मंत्री विपुल गोयल ने इसका शिलान्यास किया था। सितंबर 2019 में निर्माण कार्य शुरू हुआ। शुरुआत में परियोजना की लागत कम थी, लेकिन बाद में भवन निर्माण और आधुनिक सुविधाओं को जोड़ने के साथ खर्च बढ़ा। भवन निर्माण पर करीब ₹3.85 करोड़ और ई-लाइब्रेरी पर CSR के तहत करीब ₹1.99 करोड़ खर्च होने की जानकारी सार्वजनिक रिपोर्टों में दी गई है।
एक ही दिन दो बार हुआ उद्घाटन
अटल लाइब्रेरी का उद्घाटन 28 दिसंबर 2025 को चर्चा का विषय बन गया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एक ही दिन करीब ढाई घंटे के अंतराल में दो अलग-अलग कार्यक्रमों में लाइब्रेरी का रिबन काटा गया। पहले कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने राज्यसभा सांसद सुरेंद्र नागर और मंत्री राजेश नागर के साथ उद्घाटन किया। इसके करीब दो घंटे बाद केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर भी पहुंचे और उन्होंने दोबारा रिबन काटकर लाइब्रेरी का उद्घाटन किया।
उद्घाटन के दो कार्यक्रम होने की वजह से यह मामला स्थानीय राजनीति में चर्चा का विषय बना। कुछ मीडिया रिपोर्टों ने इसे विपुल गोयल और कृष्णपाल गुर्जर के बीच राजनीतिक खींचतान से जोड़कर देखा। वहीं, उस समय की रिपोर्टों में कृष्णपाल गुर्जर के हवाले से बताया गया था कि उन्हें आधिकारिक तौर पर मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था और उन्हें पहले हुए उद्घाटन की जानकारी नहीं थी।
अब सवाल लाइब्रेरी शुरू होने का
उद्घाटन के बाद भी लाइब्रेरी के पूरी तरह शुरू नहीं होने से अब मुख्य सवाल यह है कि तैयार भवन का इस्तेमाल विद्यार्थी कब कर पाएंगे। जिला प्रशासन की ओर से मामले की जानकारी लेने और लाइब्रेरी शुरू नहीं होने के कारणों का पता लगाने की बात कही गई है।
लाइब्रेरी की देखरेख और संचालन से जुड़ी अलग-अलग जिम्मेदारियों के कारण भी काम अटका होने की बात सामने आई है। ऐसे में करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार की गई इस सुविधा का नियमित संचालन शुरू होने का इंतजार बना हुआ है।

