July 3, 2026

जज को धमकी मामले पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन सख्त, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग

जज तबस्सुम खान को धमकी मामले पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

New Delhi/Alive News: मध्य प्रदेश की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश तबस्सुम खान को एक फैसले के बाद कथित रूप से धमकियां मिलने और सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ आपत्तिजनक अभियान चलाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने कड़ी नाराजगी जताई है।

एसोसिएशन ने कहा कि किसी भी न्यायिक अधिकारी को डराने, धमकाने या उन पर दबाव बनाने की कोशिश न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए गंभीर खतरा है। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

एससीबीए के सचिव प्रज्ञा बघेल द्वारा जारी बयान के अनुसार, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश तबस्सुम खान को एक आपराधिक मामले में फैसला सुनाने के बाद कथित तौर पर धमकियां दी गईं। उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर अभद्र टिप्पणियां और डराने-धमकाने का अभियान भी चलाया गया।

यह मामला उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें कथित गौरक्षक समूह के कुछ सदस्यों को एक लिंचिंग मामले में दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई थी।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने मध्य प्रदेश सरकार और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से पूरे मामले की निष्पक्ष, त्वरित और प्रभावी जांच कराने की मांग की है।

एसोसिएशन ने कहा कि जो लोग न्यायिक अधिकारी को धमकाने, उनके खिलाफ नफरत फैलाने या भय का माहौल बनाने में शामिल हैं, उनकी पहचान कर कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। बयान में यह भी कहा गया कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस मामले में एफआईआर दर्ज की जा चुकी है और न्यायाधीश की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है।

एससीबीए ने कहा कि जिला न्यायपालिका देश की न्याय व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। हर दिन जिला अदालतों में हजारों दीवानी और फौजदारी मामलों की सुनवाई होती है, जिनमें कई मामले बेहद संवेदनशील होते हैं।

ऐसे में न्यायिक अधिकारियों को यह भरोसा होना चाहिए कि यदि वे निष्पक्ष और कानून के अनुसार फैसला देते हैं, तो राज्य और न्यायपालिका उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।

न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर एससीबीए का संदेश

एससीबीए ने कहा कि वह न्यायाधीश तबस्सुम खान के साथ मजबूती से खड़ा है और न्यायपालिका की स्वतंत्रता, गरिमा तथा निष्पक्षता की रक्षा के अपने संकल्प को दोहराता है।

एसोसिएशन के अनुसार, किसी न्यायाधीश को उसके फैसले के कारण धमकाना केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि पूरी न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों को चुनौती देना है। इसलिए ऐसे मामलों में त्वरित और सख्त कार्रवाई बेहद जरूरी है।