July 24, 2026

सरकार और CJP के बीच आज दूसरे दौर की वार्ता, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ा संगठन; सुप्रीम कोर्ट ने मांगी जांच रिपोर्ट

New Delhi/Alive News: देशभर में पेपर लीक मामलों को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच शुक्रवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और केंद्र सरकार के बीच दूसरे दौर की वार्ता होने जा रही है। यह बैठक दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित होगी। इससे पहले 20 जुलाई को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के आवास पर हुई बातचीत किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी थी।

सरकार का दावा है कि उसने कई बार CJP को बातचीत के लिए आमंत्रित किया, जबकि CJP का कहना है कि वह किसी मंत्री के आवास पर नहीं, बल्कि तटस्थ स्थान पर ही बातचीत करेगा। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दोहराया कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी रहेगा।

CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि सरकार आंदोलन के दबाव में है और यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देर रात पेपर लीक पर वीडियो संदेश जारी करना पड़ा। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल घोषणाओं से आंदोलन समाप्त नहीं होगा और उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक प्रदर्शन जारी रहेगा।

इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने पेपर लीक मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से अब तक हुई जांच और किए गए सुधारात्मक कदमों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने कहा कि वह पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और केंद्र के हलफनामे के बाद आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।

उधर बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में पेपर लीक मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए नागपुर और औरंगाबाद में दो फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गुरुवार देर रात जारी अपने संदेश में कहा था कि पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई तेज करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था की जाएगी।

दिल्ली हाईकोर्ट शुक्रवार को जंतर-मंतर क्षेत्र में इंटरनेट सेवाओं पर लगाए गए प्रतिबंध और प्रदर्शनकारियों की निगरानी से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। वहीं प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सभी रैंक के पुलिसकर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि प्रधानमंत्री को संसद के भीतर इस मुद्दे पर जवाब देना चाहिए था। सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के साथ संवेदनहीन व्यवहार कर रही है। वहीं राहुल गांधी ने कहा कि आंदोलन की तीन प्रमुख मांगें हैं धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, 20 जुलाई को छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और छात्रों से सार्वजनिक माफी।

दूसरी ओर वरिष्ठ RSS नेता इंद्रेश कुमार ने आरोप लगाया कि CJP के आंदोलन के पीछे देश और विदेश की कुछ ताकतें सक्रिय हैं, जो भारत के विकास और शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित करना चाहती हैं।
अब सभी की नजर सरकार और CJP के बीच होने वाली वार्ता पर है। यदि बातचीत में कोई ठोस समाधान नहीं निकलता है तो आंदोलन और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।