September 3, 2026

सरकारी अधिकारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर लग सकती है रोक, जल्द आ सकती है नई आचार संहिता

सरकारी अधिकारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर नई आचार संहिता की तैयारी

New Delhi/Alive News: सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर केंद्र सरकार नई आचार संहिता ला सकती है। सूत्रों के मुताबिक, इसमें अधिकारियों को बताया जाएगा कि ड्यूटी के दौरान सोशल मीडिया पर क्या पोस्ट किया जा सकता है और किन गतिविधियों से बचना होगा। इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री के साथ सचिवों की बैठक में भी चर्चा होने की जानकारी सामने आई है।

सरकार का फोकस खास तौर पर ड्यूटी के दौरान रील बनाने और सरकारी काम या संसाधनों का इस्तेमाल व्यक्तिगत प्रचार के लिए करने पर हो सकता है। अगर कोई अधिकारी सरकारी पद या संसाधनों का इस्तेमाल अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए करता है, तो इसे सरकारी सेवक के लिए अनुचित आचरण माना जा सकता है। ऐसे मामलों में विभागीय कार्रवाई का प्रावधान किया जा सकता है।

सोशल मीडिया को लेकर अभी क्या नियम हैं?

फिलहाल सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल के लिए अलग से विस्तृत गाइडलाइन नहीं है। हालांकि, अखिल भारतीय सेवाएं (आचरण) नियमों के तहत अधिकारियों को अपने पद की गरिमा और सरकारी सेवा की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है।

ये नियम कई दशक पुराने हैं, जब सोशल मीडिया का अस्तित्व नहीं था। ऐसे में बदलते डिजिटल दौर को देखते हुए इन नियमों में बदलाव या नई व्यवस्था की जरूरत महसूस की जा रही है।

रील और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद

हाल के वर्षों में कई सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के सोशल मीडिया पोस्ट विवादों में रहे हैं। कुछ मामलों में पुलिसकर्मियों और अन्य कर्मचारियों के ड्यूटी के दौरान रील बनाने के वीडियो सामने आए। ऐसे मामलों में सरकारी सेवा की गरिमा और ड्यूटी के दौरान सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठे हैं।

मौजूदा नियमों के मुताबिक, सरकारी अधिकारी बिना सरकार की अनुमति के किसी मीडिया संस्थान का मालिकाना हक, संपादन या संचालन नहीं कर सकते। अनुमति मिलने के बाद भी मीडिया में दिए गए उनके विचार व्यक्तिगत माने जाते हैं, सरकार के आधिकारिक विचार नहीं।

इसके अलावा अधिकारी सार्वजनिक मंच या मीडिया के जरिए सरकार की मौजूदा नीतियों की आलोचना नहीं कर सकते। ऐसा कोई बयान भी नहीं दिया जा सकता जिससे केंद्र और राज्य के संबंधों या भारत के विदेशी संबंधों पर प्रतिकूल असर पड़े।

सरकारी अधिकारियों को बिना अनुमति आधिकारिक दस्तावेज या गोपनीय जानकारी मीडिया के साथ साझा करने की भी मनाही है। सरकारी नीतियों और कामकाज से जुड़ी आधिकारिक जानकारी देने का अधिकार आमतौर पर मंत्री, सचिव या सरकार की ओर से अधिकृत अधिकारी को ही होता है।