New Delhi/Alive News: बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे वकीलों के साथ कथित मारपीट के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने CBI जांच का आदेश देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को संबंधित हाईकोर्ट जाने की अनुमति दी है।
मामले का उल्लेख वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने किया। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि BCI में सुधारों की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे वकीलों के साथ कुछ लोगों ने मारपीट की। उनका दावा है कि घटना BCI परिसर में लगे CCTV कैमरों में भी रिकॉर्ड हुई है।
CCTV फुटेज को लेकर चिंता
प्रशांत भूषण ने अदालत को बताया कि कथित घटना के बाद BCI चेयरमैन की ओर से एक प्रेस बयान भी जारी किया गया था। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि इसमें प्रदर्शनकारी वकीलों के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया और कथित मारपीट को लेकर भी टिप्पणी की गई। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है और CCTV फुटेज के नष्ट होने या गायब किए जाने की आशंका है। इसी वजह से उन्होंने स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग की थी।
वकीलों के प्रदर्शन पर कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने वकीलों के प्रदर्शन के तरीके पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वकील एक अनुशासित वर्ग का हिस्सा हैं और उन्हें अपनी शिकायतों के समाधान के लिए संस्थागत व्यवस्था का इस्तेमाल करना चाहिए।
CJI सूर्यकांत ने भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले से BCI से जुड़े सुधारों के मामलों पर विचार कर रहा है। प्रशांत भूषण ने माना कि संस्थागत उपाय मौजूद हैं, लेकिन उनका कहना था कि प्रदर्शन कर रहे वकीलों के साथ कथित मारपीट को उचित नहीं ठहराया जा सकता।
हाईकोर्ट जाने को कहा
पीठ ने पूछा कि याचिकाकर्ता इस मामले में संबंधित हाईकोर्ट का रुख क्यों नहीं कर सकते। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट में उचित राहत मांगने की छूट दे दी। कोर्ट ने रजिस्ट्री को पेपरबुक वापस करने का निर्देश भी दिया, ताकि याचिकाकर्ता हाईकोर्ट के समक्ष आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर सकें।

