June 19, 2026

श्री सिद्धदाता आश्रम में भव्य दीक्षांत समारोह, 493 श्रद्धालुओं ने ग्रहण की दीक्षा

फरीदाबाद के श्री सिद्धदाता आश्रम में दीक्षांत समारोह के दौरान दीक्षा ग्रहण करते श्रद्धालु।

देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु, गुरु कृपा से भावुक हुआ भक्त समुदाय जगद्गुरु स्वामी श्रीपुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने कराया पंच-संस्कार

Faridabad/Alive News : सूरजकुंड मार्ग स्थित Shri Lakshminarayan Divya Dham – Shri Siddhadata Ashram में शुक्रवार को श्रीरामानुज संप्रदाय का भव्य दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। समारोह में दिल्ली-एनसीआर सहित हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दक्षिण अफ्रीका से आए करीब 493 श्रद्धालुओं ने दीक्षा ग्रहण कर ईश्वर के प्रति शरणागति का मार्ग स्वीकार किया।

दीक्षांत समारोह के दौरान गुरु कृपा की अनुभूति से श्रद्धालु भावुक नजर आए। श्रीरामानुज संप्रदाय की इंद्रप्रस्थ एवं हरियाणा तीर्थपीठ के पीठाधीश्वर Swami Shri Purushottamacharya Ji Maharaj ने सभी श्रद्धालुओं को एक-एक कर दीक्षित किया और उन्हें आध्यात्मिक जीवन की दिशा में आगे बढ़ने का आशीर्वाद प्रदान किया।

दीक्षा संस्कार के दौरान नवदीक्षित श्रद्धालुओं को यज्ञ, यज्ञोपवीत, शंख-चक्र धारण और नया आध्यात्मिक नाम प्रदान किया गया। श्रीरामानुज संप्रदाय की परंपरा के अनुसार पंच-संस्कार के माध्यम से दीक्षा प्रक्रिया पूर्ण कराई गई।

इसमें ताप संस्कार के अंतर्गत श्रद्धालुओं के शरीर पर शंख और चक्र के पवित्र चिह्न धारण कराए गए। पुंड्र संस्कार में उर्ध्व-पुंड्र तिलक लगाने की विधि सिखाई गई। नाम संस्कार के तहत सभी श्रद्धालुओं को नया दासत्व नाम दिया गया। इसके बाद मंत्र संस्कार में मूल रहस्य मंत्र की दीक्षा दी गई तथा जाप की विधि समझाई गई। अंत में याग संस्कार के माध्यम से दीक्षा प्रक्रिया को पूर्ण किया गया।

इस अवसर पर जगद्गुरु स्वामी श्रीपुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने कहा कि गुरु ही वह शक्ति है जो मनुष्य को अज्ञान से ज्ञान, अंधकार से प्रकाश और असफलता से सफलता की ओर ले जाती है। उन्होंने कहा कि गुरु के बिना जीवन अधूरा है और प्रत्येक व्यक्ति को अपने गुरु का सम्मान करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलना चाहिए।

उन्होंने वैकुंठवासी Swami Sudarshanacharya Ji Maharaj के संदेश “भाव में ही भाव मेरा” का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रीसंप्रदाय सामाजिक समता और सेवा का संदेश देता है, जहां ऊंच-नीच का कोई स्थान नहीं है।

जगद्गुरु ने कहा कि कलियुग में भगवान के नाम का जाप सबसे श्रेष्ठ साधन है। दीक्षा का वास्तविक उद्देश्य ईश्वर के नाम का निरंतर स्मरण और मानवता की सेवा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से सात्विक जीवनशैली अपनाने, भोजन को पहले भगवान को अर्पित करने तथा सेवा भाव को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

समारोह के दौरान भजनों और आध्यात्मिक वातावरण ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु सेवा कार्यों में भी सक्रिय रूप से जुटे रहे।