August 18, 2026

ऑपरेशन सिंदूर के शहीद के परिवार ने सम्मान लेने से किया इनकार, मूर्ति के 1.90 लाख के बिल अब भी अटके

पलवल में शहीद लांस नायक दिनेश शर्मा के परिवार ने सम्मान लेने से इनकार किया

Palwal/Alive News: ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए लांस नायक दिनेश शर्मा के परिवार ने स्वतंत्रता दिवस पर मिलने वाला सम्मान लेने से इनकार कर दिया। परिवार का आरोप है कि शहीद की मूर्ति बनवाने में करीब 1.90 लाख रुपये खर्च हुए थे, लेकिन तीन महीने से ज्यादा समय बीतने के बाद भी इन बिलों का भुगतान नहीं किया गया है।

परिवार का कहना है कि अधिकारियों ने जल्द भुगतान का भरोसा दिया था, लेकिन अब तक उन्हें भुगतान के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। परिवार ने शहीद की मूर्ति के अनावरण कार्यक्रम में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी पर भी नाराजगी जताई।

मूर्ति के अनावरण में विधायक और अधिकारी नहीं पहुंचे

परिवार के मुताबिक, 7 मई को शहीद दिनेश शर्मा की मूर्ति का अनावरण कार्यक्रम रखा गया था। इसके लिए होडल के भाजपा विधायक हरेंद्र रामरतन को परिवार ने घर जाकर कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिया था।

परिवार का आरोप है कि कार्यक्रम में न तो विधायक पहुंचे और न ही प्रशासन का कोई बड़ा अधिकारी आया। परिजनों का सवाल है कि जब शहीद की मूर्ति के अनावरण कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि और अधिकारी नहीं पहुंचे तो स्वतंत्रता दिवस पर मिलने वाला सम्मान लेने का क्या मतलब है।

विधायक हरेंद्र रामरतन ने कहा कि उन्होंने अपने निजी कोष से शहीद परिवार को 40 लाख रुपये की सहायता दी है। उनके मुताबिक, मूर्ति अनावरण के दिन उनके पहले से तय दूसरे कार्यक्रम थे और उन्हें कार्यक्रम का सही समय भी पता नहीं था, इसलिए वह वहां नहीं पहुंच सके।

पत्नी बोलीं- मुख्यमंत्री की दो घोषणाएं भी पूरी नहीं हुईं

शहीद की पत्नी सीमा देवी ने बताया कि मुख्यमंत्री नायब सैनी ने 15 मई 2025 को परिवार से मुलाकात के दौरान गांव मोहम्मदपुर का नाम बदलकर दिनेशपुर करने और शहीद के नाम पर पार्क बनाने की घोषणा की थी। परिवार के मुताबिक, दोनों घोषणाएं अभी तक पूरी नहीं हुई हैं।

परिवार ने स्कूल का नाम शहीद के नाम पर रखने और गांव के प्रवेश द्वार पर भी उनका नाम लिखने की मांग की थी। इनमें से स्कूल का नाम बदल दिया गया है।

DC डॉ. जयेंद्र छिल्लर के PA ने बताया कि मूर्ति के बिलों के भुगतान की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि जिला परिषद की ओर से भुगतान किया जाना है और DC कार्यालय से फाइल जिला परिषद के CEO को भेज दी गई है। जल्द ही बिलों का भुगतान किए जाने की बात कही गई है।

वहीं, होडल SDM बलीना राणा ने शहीद परिवार के सम्मान लेने से इनकार करने की जानकारी होने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।

कौन थे शहीद दिनेश शर्मा?

पलवल की होडल विधानसभा क्षेत्र के गांव मोहम्मदपुर निवासी दिनेश शर्मा का जन्म 30 जनवरी 1993 को हुआ था। वह 15 सितंबर 2014 को भारतीय सेना की 5 एफडी रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। उनके परिवार में पत्नी, दो बेटे और एक बेटी हैं।

उनके दो छोटे भाई कपिल और हरदत्त भी सेना में अग्निवीर हैं। एक भाई पुष्पेंद्र पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि विष्णु खेती में पिता का सहयोग करते हैं। शहीद की पत्नी सीमा देवी को हरियाणा सरकार ने शिक्षा विभाग में क्लर्क की नौकरी दी है। इससे पहले वह वकालत करती थीं।

दिनेश शर्मा जम्मू-कश्मीर के पुंछ क्षेत्र में एलओसी पर तैनात थे। 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर के बाद सीमा पर पाकिस्तान की ओर से गोलीबारी हुई। दिनेश अपने साथियों के साथ जवाबी कार्रवाई कर रहे थे।

इसी दौरान पाकिस्तानी तरफ से एक बम उनके पास गिरा। विस्फोट में दिनेश और उनके चार साथी घायल हो गए। बाद में अस्पताल में दिनेश ने दम तोड़ दिया। शहादत से कुछ समय पहले ही उन्हें लांस नायक के पद पर पदोन्नति मिली थी।

श्रद्धांजलि सभा के खर्च को लेकर भी विवाद

शहीद का पार्थिव शरीर 8 मई को गांव पहुंचा था, जहां राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। 20 मई को श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई।

शहीद के पिता ने आरोप लगाया कि श्रद्धांजलि सभा के खर्च के नाम पर सरपंच कुमार युगपुरुष के पिता भूपराम पाठक ने उनसे कुल 52 हजार रुपये लिए। उनका दावा है कि 17 मई को घर पर 22 हजार रुपये नकद दिए गए और बाद में 10 हजार, 5 हजार और 15 हजार रुपये अलग-अलग समय पर दिए गए।

परिवार के मुताबिक, उन्हें बताया गया था कि बाद में यह राशि पंचायत के बजट से वापस कर दी जाएगी।

हालांकि, भूपराम पाठक ने आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्होंने किसी से पैसे नहीं लिए और श्रद्धांजलि सभा का पूरा खर्च अपनी जेब से किया।

पार्क बनाने और गांव का नाम बदलने का मामला

शहीद का अंतिम संस्कार जिस जमीन पर हुआ, वहां शहीदी स्थल और पार्क बनाने की बात कही गई थी। सरपंच भूपराम पाठक के मुताबिक, जमीन करीब 4 कनाल 11 मरले है और प्रस्तावित पार्क वाली जगह जोहड़ के नाम पर दर्ज है। उनका कहना है कि पंचायत वहां पार्क नहीं बना सकती।

पंचायत ने इस संबंध में प्रस्ताव DC को भेजा था, लेकिन अभी इसे मंजूरी नहीं मिली है।

गांव का नाम मोहम्मदपुर से दिनेशपुर करने के लिए 29 जुलाई को अधिकारियों की मौजूदगी में ग्राम सभा की बैठक हुई। गांव की आबादी करीब 1,200 है और 620 मतदाता हैं। बैठक में 152 लोग शामिल हुए।

BDPO नरेश के मुताबिक, ग्राम सभा में गांव का नाम बदलने का प्रस्ताव रखा गया, लेकिन इस पर सहमति नहीं बनी। इसके बाद उपस्थित लोगों के हस्ताक्षर लेकर DC को इसकी जानकारी भेजी गई।

शहीद परिवार की नाराजगी के बीच अब उनकी मूर्ति के लंबित भुगतान, पार्क निर्माण और गांव का नाम बदलने की मांग पर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर है।