August 18, 2026

अगस्त-सितंबर में कमजोर रहेगा मॉनसून? अल नीनो के असर से बारिश में कमी की आशंका

भारत में अगस्त सितंबर के दौरान कमजोर मॉनसून और अल नीनो का असर

New Delhi/Alive News: भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की रफ्तार कमजोर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट वेदर ने मॉनसून के बाकी महीनों में बारिश कम होने का अनुमान जताया है। एजेंसी के मुताबिक, इस साल देश में सामान्य से काफी कम बारिश हो सकती है और सूखे का खतरा बढ़ सकता है।

स्काईमेट ने अपने अनुमान में मॉनसून सीजन की कुल बारिश को दीर्घकालिक औसत (LPA) का 85% रहने का अनुमान जताया है। इससे पहले अप्रैल में एजेंसी ने LPA के 94% बारिश का अनुमान लगाया था। स्काईमेट के मुताबिक, प्रशांत महासागर में मजबूत हो रहा अल नीनो मॉनसून को प्रभावित कर सकता है।

अगस्त और सितंबर में बारिश कम होने की आशंका

स्काईमेट के अनुसार, मॉनसून के बाकी हिस्से में बारिश का वितरण सामान्य नहीं रहेगा। अगस्त के अंत तक बारिश में औसतन करीब 16% कमी रह सकती है।

सितंबर में अल नीनो के और मजबूत होने की संभावना के चलते बारिश में और गिरावट आने का अनुमान है। एजेंसी के मुताबिक, सितंबर में बारिश सामान्य से करीब 20% कम रह सकती है।

हालांकि, मौसम का वास्तविक रुख क्षेत्र और समय के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

IMD के आंकड़ों में भी बारिश की कमी

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से 17 अगस्त के बीच देश में 518.7 मिमी बारिश दर्ज हुई, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश करीब 596 मिमी होनी चाहिए थी। यानी बारिश सामान्य से करीब 13% कम रही।

पूरे मॉनसून सीजन में देश में औसतन करीब 870 मिमी बारिश होती है। IMD ने इससे पहले जून में अपने मॉनसून अनुमान को घटाकर LPA का 90% किया था और बारिश में कमी की संभावना जताई थी।

यूपी, दिल्ली और उत्तर-पश्चिम भारत में भी कमी

उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और हरियाणा समेत उत्तर-पश्चिम भारत में भी बारिश सामान्य से कम रही है।

इन क्षेत्रों में 17 अगस्त तक 361.7 मिमी बारिश दर्ज हुई, जबकि सामान्य आंकड़ा करीब 408.7 मिमी है। यानी यहां करीब 12% बारिश की कमी दर्ज हुई है।

दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में भी बारिश सामान्य से कम रही। यहां 375 मिमी बारिश दर्ज हुई, जबकि सामान्य आंकड़ा करीब 477 मिमी है।

अल नीनो से क्यों बढ़ती है चिंता?

अल नीनो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक गर्म होने की स्थिति है। इसका असर दुनिया के कई हिस्सों के मौसम पर पड़ सकता है।

भारत में अल नीनो की स्थिति अक्सर मॉनसून के कमजोर होने से जोड़ी जाती है। हालांकि, हर अल नीनो वर्ष में देश के सभी हिस्सों में बारिश का असर एक जैसा नहीं होता।

फिलहाल अगस्त और सितंबर की बारिश पर नजर बनी हुई है। अगर मॉनसून कमजोर रहता है तो खेती, जल भंडारण और कई राज्यों में पानी की उपलब्धता पर इसका असर पड़ सकता है।