September 2, 2026

फरीदाबाद में आज से प्रॉपर्टी टैक्स और पानी-सीवर की नई दरें लागू, कुछ शुल्क 200% तक बढ़े

Faridabad property tax water sewer new rates from September 1

Faridabad/Alive News: शहर के लोगों के लिए 1 सितंबर से घर और संपत्ति से जुड़े खर्चों में बदलाव हो गया है। नगर निगम क्षेत्र में अब प्रॉपर्टी टैक्स की गणना कलेक्टर रेट के आधार पर की जाएगी। इसके साथ ही पानी और सीवर के लिए नई दरें भी लागू हो गई हैं।

पानी के शुल्क में करीब 14 साल बाद बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था में पानी का बिल खपत के हिसाब से तय होगा। वहीं बिना मीटर वाले कनेक्शनों के लिए भी अलग-अलग श्रेणी के अनुसार नया मासिक शुल्क तय किया गया है। कुछ श्रेणियों में शुल्क पहले की तुलना में 200 फीसदी तक बढ़ गया है।

कलेक्टर रेट के हिसाब से तय होगा प्रॉपर्टी टैक्स

नई व्यवस्था के तहत प्रॉपर्टी टैक्स तय करने में संबंधित इलाके का कलेक्टर रेट महत्वपूर्ण होगा। इसका मतलब है कि एक ही आकार के मकान का टैक्स अलग-अलग इलाकों में अलग हो सकता है। जिस क्षेत्र का कलेक्टर रेट ज्यादा होगा, वहां समान क्षेत्रफल की संपत्ति पर दूसरे क्षेत्र की तुलना में ज्यादा प्रॉपर्टी टैक्स देना पड़ सकता है।

ज्यादा पानी इस्तेमाल किया तो ज्यादा बिल

नई व्यवस्था में पानी का शुल्क खपत के आधार पर तय किया गया है। 500 वर्ग गज तक के घरेलू कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को हर महीने 10 किलोलीटर तक पानी इस्तेमाल करने पर पानी का शुल्क नहीं देना होगा।

इसके बाद दरें इस प्रकार होंगी:

  • 10 से 20 किलोलीटर: 6 रुपए प्रति किलोलीटर
  • 20 से 30 किलोलीटर: 9.50 रुपए प्रति किलोलीटर
  • 30 किलोलीटर से ज्यादा: 12 रुपए प्रति किलोलीटर

इस व्यवस्था का उद्देश्य ज्यादा पानी इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं से अधिक शुल्क लेना और पानी की खपत को नियंत्रित करना है।

बिना मीटर वाले कनेक्शन पर भी बढ़ा शुल्क

जिन घरों और प्रतिष्ठानों में पानी के मीटर नहीं लगे हैं, उनके लिए भी नई दरें लागू की गई हैं। पहले ऐसे कनेक्शनों पर औसतन करीब 48 रुपए प्रति माह शुल्क लिया जाता था। अब कनेक्शन की श्रेणी के अनुसार मासिक शुल्क 175 रुपए से 870 रुपए तक निर्धारित किया गया है। इसका सबसे ज्यादा असर बिना मीटर वाले उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।

पानी के बिल के साथ जुड़ेगा सीवर शुल्क

नई व्यवस्था में घरेलू और व्यावसायिक कनेक्शनों के लिए सीवर शुल्क पानी के बिल का 25 फीसदी निर्धारित किया गया है। इसलिए पानी की खपत बढ़ने पर पानी का शुल्क बढ़ेगा और उसके साथ सीवर शुल्क भी बढ़ जाएगा। यानी ज्यादा पानी इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं को दोहरी बढ़ोतरी का असर महसूस हो सकता है।

पानी बचाने पर जोर

नई दरें लागू करने के पीछे सरकार का तर्क है कि पानी की खपत को नियंत्रित किया जाए और लोगों को जल संरक्षण के लिए प्रोत्साहित किया जाए। हालांकि, नई व्यवस्था से ज्यादा पानी इस्तेमाल करने वाले और बिना मीटर वाले उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। वहीं प्रॉपर्टी टैक्स में कलेक्टर रेट को आधार बनाने से अलग-अलग क्षेत्रों में समान आकार की संपत्तियों के टैक्स में भी अंतर देखने को मिल सकता है।