June 30, 2026

भरत तिवारी एनकाउंटर केस: सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार, हाई कोर्ट जाने को कहा

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले पर सुप्रीम कोर्ट

New Delhi/Alive News: बिहार के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह पहले संबंधित हाई कोर्ट का रुख करें। अदालत का मानना है कि हाई कोर्ट इस मामले की निगरानी करने में सक्षम है।

जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की पीठ ने सुनवाई के दौरान पूछा, “आप हाई कोर्ट क्यों नहीं गए? हाई कोर्ट इस मामले की मॉनिटरिंग कर सकता है।” इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया।

यह जनहित याचिका अधिवक्ता विशाल तिवारी ने दायर की थी। याचिका में भरत भूषण तिवारी की एनकाउंटर में हुई मौत की जांच सीबीआई से कराने, सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र जांच समिति गठित करने और एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी।

याचिका में भारत सरकार, बिहार सरकार, राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और सीबीआई को प्रतिवादी बनाया गया है। इससे पहले भी इस मामले का उल्लेख सुप्रीम कोर्ट में किया गया था, लेकिन तब भी अदालत ने तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को रजिस्ट्री के माध्यम से मामला सूचीबद्ध कराने की सलाह दी थी।

याचिका के अनुसार, 17 जून को बिहार के भोजपुर जिले में 28 वर्षीय भरत भूषण तिवारी की पुलिस एनकाउंटर में मौत हुई थी। इसमें दावा किया गया है कि घटना से कुछ घंटे पहले भरत तिवारी ने फेसबुक लाइव के जरिए कुछ शर्तें पूरी होने पर आत्मसमर्पण करने की इच्छा जताई थी।

याचिका में मृतक के पिता काशीनाथ तिवारी के आरोपों का भी उल्लेख किया गया है। उनका दावा है कि उनके बेटे का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था और न ही उसके खिलाफ कोई एफआईआर या चार्जशीट दर्ज थी। उन्होंने आरोप लगाया कि आत्मसमर्पण के बाद भी उसे गोली मार दी गई।

याचिकाकर्ता का कहना है कि एनकाउंटर में होने वाली मौतों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है, क्योंकि ऐसे मामलों में कानून के शासन और मानवाधिकारों से जुड़े गंभीर सवाल उठते हैं। याचिका में यह भी कहा गया है कि घटना के बाद गांव में विरोध प्रदर्शन हुए और स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले में कोई आदेश पारित नहीं किया है। अदालत ने याचिकाकर्ता को पहले हाई कोर्ट जाने की सलाह दी है, जहां मामले से जुड़ी सभी मांगों पर सुनवाई की जा सकती है।