September 9, 2026

हक का स्कूल मिला नहीं, 752 बच्चों की पढ़ाई अब भी अटकी

हरियाणा में 1107 निजी स्कूल RTE नियमों के उल्लंघन और दस्तावेज न देने पर ब्लैकलिस्ट किए गए।

Faridabad/Alive News: निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरटीई के तहत 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की डबल बेंच ने कानूनी और संवैधानिक रूप से जायज ठहराया है। कोर्ट ने साफ किया है कि बिना सहायता वाले निजी स्कूलों को एंट्री लेवल कक्षा में आरटीई के तहत 25 प्रतिशत सीटों पर पात्र बच्चों को दाखिला देना ही होगा। इस फैसले के बाद फरीदाबाद में आरटीई दाखिले से वंचित बच्चों के अभिभावकों की उम्मीद बढ़ी है। जिले में इस वर्ष आरटीई के तहत 1,519 बच्चों का चयन कर उन्हें निजी स्कूल आवंटित किए गए थे, लेकिन मंच के अनुसार इनमें से 752 बच्चों को अब तक सीबीएसई स्कूलों ने दाखिला नहीं दिया है।

हरियाणा अभिभावक एकता मंच का कहना है कि हाईकोर्ट का फैसला निजी स्कूलों के लिए स्पष्ट संदेश है कि ऑनलाइन आवेदन, स्कूल मैपिंग और ड्रॉ में चयनित पात्र बच्चों को दाखिला देने से इनकार नहीं किया जा सकता। मंच ने सरकार से ऐसे स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने और जरूरत पड़ने पर उनकी मान्यता रद्द करने की मांग की है। उनके अनुसार, इस वर्ष हरियाणा बोर्ड से जुड़े निजी स्कूलों ने 767 बच्चों को दाखिला दिया, जबकि सीबीएसई स्कूलों में चयनित 752 बच्चों को दाखिला नहीं मिला। मंच का दावा है कि जिला शिक्षा अधिकारी फरीदाबाद ने पिछले वर्ष 28 और इस वर्ष 44 सीबीएसई स्कूलों द्वारा पात्र बच्चों को दाखिला नहीं देने की शिकायत शिक्षा निदेशक को भेजी थी, लेकिन अभी तक इन स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।

मंच के प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा और जिला महासचिव एडवोकेट बीएस विरदी ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद सरकार को आरटीई नियमों को सख्ती से लागू कराना चाहिए। उनके  कानूनी प्रयासों से अब तक 12 पात्र बच्चों को दाखिला दिलाया जा चुका है, जबकि अन्य बच्चों के दाखिले के लिए भी प्रयास जारी हैं।