September 2, 2026

सुप्रीम कोर्ट ने NEET प्रदर्शन की FIR रद्द कीं: 2,873 लोगों पर कार्रवाई की छूट, CJP ने 5 सितंबर का मार्च वापस लिया

सुप्रीम कोर्ट ने NEET प्रदर्शन से जुड़ी FIR रद्द कीं

New Delhi/Alive News: सुप्रीम कोर्ट ने 20 से 25 जुलाई के बीच NEET पेपर लीक के विरोध में हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी FIR को रद्द करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि इन प्रदर्शनों से संबंधित देश के किसी भी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश में दर्ज मामलों को आगे नहीं चलाया जाएगा। इसी के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर को प्रस्तावित अपना मार्च वापस लेने का फैसला किया।

सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आदेश मामले के विशेष तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए दिया गया है और इसे दूसरे मामलों के लिए सामान्य मिसाल या बाध्यकारी फैसला नहीं माना जाएगा।

हालांकि, सभी लोगों को इस राहत का लाभ नहीं मिलेगा। दिल्ली पुलिस को उन 2,873 लोगों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने की अनुमति दी गई है, जिनके गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड बताए गए हैं। हालांकि सिर्फ प्रदर्शन में मौजूद रहने के आधार पर नहीं, बल्कि संबंधित गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि और मामले की परिस्थितियों के आधार पर कार्रवाई की जा सकेगी।

सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार प्रदर्शनकारियों के साथ किए गए आश्वासनों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। केंद्र और कुछ राज्यों की ओर से प्रदर्शन से जुड़ी FIR को खत्म करने के लिए आवेदन भी दाखिल किए गए थे।

सुनवाई से पहले CJP ने 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित मार्च वापस लेने का फैसला किया। CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि केंद्र के सकारात्मक रुख और FIR खत्म करने के फैसले के बाद संगठन ने अपना विरोध मार्च वापस लेने का निर्णय लिया है।

यह मामला जुलाई में हुए NEET पेपर लीक विरोधी छात्र आंदोलन से जुड़ा है। 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प हुई थी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था। इसके बाद दिल्ली के साथ कई अन्य राज्यों में भी विरोध प्रदर्शन हुए थे।

इस आंदोलन की शुरुआत 20 जून को जंतर-मंतर से हुई थी। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में NEET से जुड़े विवाद पर कार्रवाई और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा शामिल था। बाद में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत के बाद 25 जुलाई को आंदोलन खत्म किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश से 20 से 25 जुलाई के प्रदर्शनों से जुड़े छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों को बड़ी कानूनी राहत मिली है। कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इसी अवधि के उन्हीं प्रदर्शन संबंधी मामलों में नए सिरे से FIR दर्ज कर कार्रवाई न की जाए।