June 11, 2026

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: गृहिणियां सिर्फ होममेकर नहीं, ‘नेशन बिल्डर’ हैं

गृहिणियों के योगदान को लेकर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला।

New Delhi/Alive News: गृहिणियों के योगदान को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि घर संभालने वाली महिलाएं केवल “होममेकर” नहीं हैं, बल्कि वे “नेशन बिल्डर” यानी राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाती हैं।

जस्टिस संजय करोल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि गृहिणियों का योगदान सिर्फ घर के कामकाज तक सीमित नहीं होता। वे बच्चों के पालन-पोषण, परिवार के विकास और समाज को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसलिए उनके काम को सामाजिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर उचित मान्यता मिलनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि गृहिणियों द्वारा किए जाने वाले घरेलू काम और परिवार की देखभाल का आर्थिक मूल्य होता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि यदि किसी सड़क दुर्घटना के कारण परिवार गृहिणी की देखभाल और सेवाओं से वंचित हो जाता है, तो मुआवजा तय करते समय इस योगदान को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

इसी के तहत अदालत ने “लॉस ऑफ डोमेस्टिक केयर” (घरेलू देखभाल के नुकसान) का मूल्य ₹30,000 प्रति माह निर्धारित किया है। यह मुआवजा तय करने के लिए एक नया मार्गदर्शक सिद्धांत माना जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों से भी आग्रह किया कि मोटर दुर्घटना मुआवजा मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया जाए। अदालत ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 169 के तहत निर्धारित संक्षिप्त प्रक्रिया का पूरी तरह पालन होना चाहिए, ताकि पीड़ितों और उनके परिवारों को जल्द न्याय मिल सके।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला गृहिणियों के अवैतनिक घरेलू श्रम को कानूनी और आर्थिक मान्यता देने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो समाज में उनके योगदान को नई पहचान देगा।