New Delhi/Alive News: सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा देने के लिए भारत में लागू फांसी की मौजूदा व्यवस्था को खत्म करने की मांग वाली याचिका मंगलवार को खारिज कर दी। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई आधार नहीं है, जिसके चलते फांसी की व्यवस्था को असंवैधानिक घोषित किया जाए।
याचिका में फांसी को क्रूर, अमानवीय और पीड़ादायक बताते हुए इसकी जगह अन्य तरीकों से मौत की सजा देने की मांग की गई थी। इनमें जहरीले इंजेक्शन और गोली मारने सहित चार वैकल्पिक तरीके शामिल थे।
हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिका खारिज होने का मतलब यह नहीं है कि भविष्य में इस मुद्दे की संवैधानिक समीक्षा नहीं हो सकती। अगर आगे ठोस वैज्ञानिक, मेडिकल या अनुभवजन्य प्रमाण सामने आते हैं, तो फांसी की प्रक्रिया की दोबारा समीक्षा की जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार विशेषज्ञों की एक समिति बनाकर मौत की सजा देने के मौजूदा तरीके की व्यापक समीक्षा कर सकती है समिति यह देख सकती है कि क्या कोई दूसरा तरीका ऐसा है, जिससे दोषी को अनावश्यक पीड़ा कम हो और उसकी गरिमा भी बनी रहे।
2017 में दायर हुई थी याचिका
वरिष्ठ वकील ऋषि मल्होत्रा ने 2017 में यह याचिका दायर की थी। याचिका में दावा किया गया था कि फांसी की प्रक्रिया में काफी समय लग सकता है, जबकि गोली मारने या जहरीले इंजेक्शन जैसे तरीकों में अपेक्षाकृत कम समय लग सकता है।
याचिका में तत्कालीन CrPC की धारा 354(5) को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई थी। इसी प्रावधान में मौत की सजा पाए दोषी को गर्दन से तब तक लटकाने की व्यवस्था है, जब तक उसकी मृत्यु न हो जाए।
याचिकाकर्ता ने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन और गरिमा के अधिकार के खिलाफ बताया था। साथ ही, मौत की सजा पाए कैदी को फांसी और अन्य उपलब्ध तरीकों में से विकल्प चुनने का अधिकार देने की मांग की गई थी।
केंद्र ने फांसी की व्यवस्था का किया था बचाव
2018 में केंद्र सरकार ने मौजूदा फांसी की व्यवस्था का बचाव किया था। गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा था कि फांसी से मौत तेजी से और अपेक्षाकृत कम पीड़ा के साथ होती है।
केंद्र ने जहरीले इंजेक्शन और गोली मारने जैसे वैकल्पिक तरीकों को फांसी से कम पीड़ादायक मानने पर भी आपत्ति जताई थी।
2023 में सुप्रीम कोर्ट ने मांगा था बेहतर डेटा
मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की प्रक्रिया से होने वाली पीड़ा, मृत्यु में लगने वाले समय और इससे जुड़ी व्यवस्थाओं पर केंद्र से बेहतर डेटा मांगा था। अदालत ने इस मामले की जांच के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने की संभावना पर भी विचार किया था।
मई 2023 में तत्कालीन अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने बताया था कि उन्होंने मौत की सजा देने के बेहतर विकल्पों की जांच के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने की सिफारिश की है। केंद्र सरकार समिति के सदस्यों को लेकर विचार कर रही थी।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की मौजूदा व्यवस्था को असंवैधानिक घोषित करने से इनकार कर दिया है, लेकिन वैज्ञानिक और चिकित्सकीय प्रमाण सामने आने पर भविष्य में इस विषय पर दोबारा विचार की संभावना खुली रखी है।

