Jaipur/Alive News: जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सोमवार सुबह एक माइक्रोलाइट एयरक्राफ्ट हादसे का शिकार हो गया। ट्रेनिंग फ्लाइट के लिए विमान को पार्किंग एरिया से रनवे की ओर ले जाया जा रहा था। इसी दौरान ग्राउंड हैंडलिंग एजेंसी के एक वाहन ने विमान को टक्कर मार दी।
टक्कर के कारण विमान क्षतिग्रस्त हो गया। राहत की बात यह रही कि विमान में मौजूद विंग कमांडर पायलट और ट्रेनी NCC कैडेट दोनों सुरक्षित हैं। हादसा सुबह करीब 9 बजे हुआ।
रनवे ले जाते समय हुआ हादसा
जानकारी के मुताबिक, माइक्रोलाइट एयरक्राफ्ट को हैंगर से हवाई पट्टी की ओर ले जाया जा रहा था। विमान में पायलट के साथ एक NCC कैडेट भी मौजूद था। उसी दौरान एयरपोर्ट परिसर में ग्राउंड हैंडलिंग एजेंसी इंडोथाई का वाहन भी आगे बढ़ रहा था।
दोनों की टक्कर के बाद एयरपोर्ट परिसर में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों में हलचल मच गई। हादसे के बाद विमान और ग्राउंड वाहन को सुरक्षित किया गया और संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई।
विमान को दोबारा उड़ान के लिए इस्तेमाल करने से पहले तकनीकी जांच की जाएगी। जांच के बाद ही यह तय होगा कि विमान कब तक उड़ान के लिए फिट होगा।
ग्राउंड व्हीकल मैनेजमेंट पर सवाल
हादसे के बाद एयरपोर्ट के एयरपोर्ट ऑपरेशंस कंट्रोल सेंटर (AOCC) और ग्राउंड व्हीकल मैनेजमेंट की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। एप्रन क्षेत्र में विमान और ग्राउंड वाहनों की आवाजाही के दौरान सुरक्षा नियमों और आपसी समन्वय का पालन बेहद जरूरी होता है।
प्रारंभिक तौर पर ग्राउंड व्हीकल मैनेजमेंट में चूक की आशंका जताई जा रही है। हालांकि हादसे की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।
कम्युनिकेशन और सेफ्टी कोऑर्डिनेशन की होगी जांच
जांच में यह भी देखा जाएगा कि विमान को एप्रन से रनवे की ओर ले जाने की अनुमति किस तरह दी गई और उसी समय ग्राउंड वाहन की आवाजाही कैसे हुई।
अधिकारी यह भी जांच करेंगे कि विमान और वाहन के बीच आवश्यक कम्युनिकेशन और सेफ्टी कोऑर्डिनेशन मौजूद था या नहीं। NCC कैडेट्स की फ्लाइंग ट्रेनिंग में इस्तेमाल होने वाले माइक्रोलाइट एयरक्राफ्ट की सुरक्षा को देखते हुए इस घटना को गंभीरता से लिया जा रहा है।
जयपुर एयरपोर्ट की व्यस्तता पर भी सवाल
जयपुर एयरपोर्ट पर रोज बड़ी संख्या में विमानों का संचालन होता है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यहां सामान्य दिनों में करीब 95 विमानों की लैंडिंग और टेकऑफ होती हैं, जबकि सर्दियों में यह संख्या 140 से 150 तक पहुंच सकती है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इतने व्यस्त एयरपोर्ट पर NCC के माइक्रोलाइट विमानों की ट्रेनिंग के लिए पर्याप्त सुरक्षित और अलग मूवमेंट व्यवस्था है या नहीं।
सुरक्षा के लिहाज से NCC की ट्रेनिंग को जयपुर के आसपास किसी कम व्यस्त एयरपोर्ट, जैसे किशनगढ़ एयरपोर्ट, पर संचालित करने के विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है। इससे कमर्शियल फ्लाइट और ट्रेनिंग विमानों की आवाजाही के बीच संभावित जोखिम कम किया जा सकता है।
फिलहाल हादसे की तकनीकी और सुरक्षा जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि विमान और ग्राउंड वाहन की टक्कर किस वजह से हुई और इसमें किस स्तर पर चूक हुई।

