June 6, 2026

नंगला गुजरान के सरकारी स्कूल में रिकॉर्ड रूम में लगी आग, दो दिन पहले भी हुआ था शॉर्ट सर्किट

Faridabad/Alive News: नंगला गुजरान स्थित राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बुधवार को देर रात रिकॉर्ड रूम में आग लगने से स्कूल का लगभग 30 प्रतिशत महत्वपूर्ण रिकॉर्ड जलकर राख हो गया। हैरानी की बात यह है कि इसी रिकॉर्ड रूम में दो दिन पहले भी शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी थी, लेकिन तब कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ था। बावजूद इसके स्कूल प्रबंधन द्वारा न तो वायरिंग ठीक करवाई गई और न ही किसी तरह के सुरक्षा इंतजाम किए गए। अब दूसरी बार लगी आग में स्कूल के कुछ जरूरी दस्तावेज पूरी तरह जल गए।

सुबह स्कूल में काम करने वाली महिला चौकीदार जब स्कूल पहुंची तो रिकॉर्ड रूम से धुआं निकलता दिखाई दिया। इसके बाद मामले की जानकारी स्कूल प्रशासन को दी गई। स्कूल में किसी भी तरह का आगजनी और आपात स्थिति से निपटने के इंतजाम न होने के कारण आग पर मिट्टी और पानी फेंक कर काबू पाया गया, लेकिन तब तक रिकॉर्ड रूम में रखा 20 से 30 प्रतिशत महत्वपूर्ण दस्तावेजी रिकॉर्ड जल चुका था। स्कूल प्रिंसिपल का कहना है कि आग संदिग्ध परिस्थितियों में लगी है और इसके कारणों की जांच पुलिस की टीम कर रही है। जांच के बाद उचित करवाई की जाएगी। 

सबसे बड़ा सवाल स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था पर खड़ा हो रहा है। जिस स्कूल में सैकड़ों बच्चे पढ़ते हैं वहां आग बुझाने तक की कोई व्यवस्था मौजूद नहीं है। स्कूल में न फायर एक्सटिंग्विशर है और न ही किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए जरूरी उपकरण। गनीमत रही कि आग देर रात लगी। अगर यही हादसा स्कूल समय में होता, जब बच्चे स्कूल में मौजूद रहते, तो बड़ा हादसा हो सकता था।

स्कूल की बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्कूल में नियमित कमरों की कमी है, सीटें कम हैं, लेकिन दाखिले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। हालत यह है कि कई बार बच्चों को स्कूल ग्राउंड में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है। इस बार स्कूल का परीक्षा परिणाम भी कमजोर रहा है, जिसके बाद शिक्षा व्यवस्था और स्कूल प्रबंधन दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सरकार और प्रशासन समय-समय पर स्कूलों में मॉक ड्रिल करवाने और सुरक्षा को लेकर बड़े दावे करते हैं। आगजनी और आपात स्थिति से निपटने के लिए मॉक ड्रिल्स आयोजित की जाती हैं, लेकिन जब स्कूलों में आग बुझाने के बुनियादी संसाधन तक मौजूद नहीं हैं, तब इन मॉक ड्रिल्स का वास्तविक फायदा क्या है? सवाल यह भी है कि क्या ये मॉक ड्रिल्स केवल कागजी खानापूर्ति बनकर रह गई हैं। जिस स्कूल में बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी उपकरण तक नहीं हैं, वहां किसी बड़े हादसे की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा।

विद्यालय के रिकार्ड रूम निरीक्षण किया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। आग शार्ट सर्किट से लगी है या किसी ने जानबूझकर लगाई है, यह जांच के बाद ही पता चलेगी। अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है। फिलहाल मामले की जांच चल रही है।
-धीरज सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी।