July 2, 2026

तिब्बत के दम पर हिमालय के पार ताकत बढ़ा रहा चीन? ब्रह्मा चेलानी ने भारत को किया सतर्क

चीन की तिब्बत रणनीति और हिमालय क्षेत्र को लेकर भारत के लिए ब्रह्मा चेलानी की चेतावनी

New Delhi/Alive News: चीन लगातार एशिया में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। वह ताइवान, दक्षिण चीन सागर, पूर्वी चीन सागर और भारत के कुछ सीमावर्ती इलाकों पर भी अपना दावा करता रहा है। इसी बीच रक्षा मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने चीन की रणनीति को लेकर भारत को सतर्क रहने की सलाह दी है।

ब्रह्मा चेलानी का कहना है कि तिब्बत एशिया का सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक क्षेत्र है। इसे अक्सर “दुनिया की छत” कहा जाता है। तिब्बती पठार हिमालय के ऊपर स्थित है और यहां से दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य एशिया के कई हिस्सों पर नजर रखी जा सकती है।

उनके अनुसार, तिब्बत पर चीन का नियंत्रण उसे हिमालय के पार अपनी सैन्य और रणनीतिक ताकत बढ़ाने का मौका देता है। साथ ही, तिब्बत से निकलने वाली कई बड़ी नदियों के स्रोत भी यहीं हैं। ऐसे में चीन सीमा पार बहने वाली नदियों के जल प्रवाह को प्रभावित करने की क्षमता रखता है, जो भारत समेत कई देशों के लिए चिंता का विषय हो सकता है।

इन क्षेत्रों में चीन का दावा या प्रभाव

भारत की सीमा: चीन लद्दाख के अक्साई चिन और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों पर दावा करता है। वह अरुणाचल प्रदेश को “दक्षिण तिब्बत” बताता है।

ताइवान: चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और उसे मुख्य भूमि में शामिल करने की बात करता है। इसी कारण ताइवान के आसपास उसकी सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं।

दक्षिण चीन सागर: दुनिया के बड़े समुद्री व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। चीन इस क्षेत्र के अधिकांश हिस्से पर अपना दावा करता है, जिससे कई देशों के साथ उसका विवाद है।

पूर्वी चीन सागर: यहां जापान के नियंत्रण वाले सेनकाकू द्वीपों को लेकर चीन और जापान के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है।

मलक्का जलडमरूमध्य: चीन का अधिकांश तेल आयात इसी समुद्री मार्ग से होता है। इसलिए वह हिंद महासागर में अपनी मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है।

ग्वादर और हंबनटोटा बंदरगाह: पाकिस्तान के ग्वादर और श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाहों में चीन ने बड़े निवेश किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी रणनीतिक स्थिति मजबूत हुई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को सीमा सुरक्षा, जल संसाधनों और क्षेत्रीय रणनीति के मामले में चीन की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए रखने की जरूरत है।