विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस आज: मेनोपॉज के बाद महिलाओं में बढ़ता है खतरा, समय पर जांच जरूरी
Prabhjot Kour/Alive News
Faridabad: हड्डियों में कमजोरी को बढ़ती उम्र का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। ऑस्टियोपोरोसिस ऐसी बीमारी है, जिसमें हड्डियां धीरे-धीरे कमजोर और नाजुक हो जाती हैं। इससे मामूली चोट या गिरने पर भी फ्रैक्चर हो सकता है। कई बार बीमारी का पता तब चलता है, जब हड्डी टूट जाती है। 20 अक्टूबर को विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस के अवसर पर डॉक्टरों ने हड्डियों की सेहत का ध्यान रखने और समय पर जांच कराने की सलाह दी है।
ग्रेटर फरीदाबाद सेक्टर-86 स्थित एकॉर्ड अस्पताल के चेयरमैन एवं आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. युवराज कुमार ने बताया कि कैल्शियम और विटामिन-डी की कमी, शारीरिक गतिविधियों का अभाव और हार्मोनल बदलाव हड्डियों को कमजोर कर सकते हैं। महिलाओं में मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होने से ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। शुरुआती दौर में इसके स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते, इसलिए लोग समय पर ध्यान नहीं दे पाते।
पीठ दर्द और लंबाई कम होना भी संकेत
यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, सेक्टर-88 के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के सीनियर कंसल्टेंट एवं एचओडी डॉ. अंकुर धीमान ने बताया कि लगातार पीठ दर्द, लंबाई कम होना, शरीर का आगे झुकना और बार-बार फ्रैक्चर होना हड्डियों की कमजोरी के संकेत हो सकते हैं। रीढ़, कूल्हे और कलाई की हड्डियों में फ्रैक्चर का खतरा अधिक रहता है। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
खानपान और व्यायाम से करें बचाव
डॉक्टरों के अनुसार, दूध, दही, पनीर और हरी पत्तेदार सब्जियों को भोजन में शामिल करना चाहिए। विटामिन-डी के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार धूप लेना और नियमित पैदल चलना भी फायदेमंद है। धूम्रपान से बचना और सक्रिय जीवनशैली अपनाना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से बोन मिनरल डेंसिटी (बीएमडी) जांच करानी चाहिए, जिससे हड्डियों की मजबूती का पता लगाया जा सकता है। समय पर जांच और सही देखभाल से फ्रैक्चर का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है।

