Noida/Alive News: गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र अक्षत त्रिपाठी को सीजेपी द्वारा दिल्ली के जंतर-मंतर पर किए गए प्रदर्शन में शामिल होने के मामले में पांच लाख रुपये के निजी मुचलके का नोटिस जारी करने के प्रकरण में एसीपी तृतीय पर कार्रवाई को लेकर पुलिस ने स्थिति स्पष्ट नहीं की है।
अपर पुलिस आयुक्त कानून एवं व्यवस्था राजीव नारायण मिश्र का कहना है कि एसीपी स्तर के अधिकारी का निलंबन शासन स्तर से होता है, अभी तक इस संबंध में लिखित में कोई निर्देश नहीं मिला है। उनका दावा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही एसीपी स्तर के अधिकारी पर कार्रवाई तय की जाएगी।
अपर पुलिस आयुक्त ने बताया कि उक्त मामले में अभी तक सिर्फ आख्या तैयार करने वाले उपनिरीक्षक शिवा पांडेय को निलंबित किया गया है। पूरे प्रकरण की जांच एडीसीपी ग्रेटर नोएडा संतोष कुमार को सौंपी गई है।
इन अफसरों की भूमिका की चल रही जांच
वह ईकोटेक-वन कोतवाली प्रभारी अरविंद वर्मा, एसीपी ग्रेटर नोएडा-तृतीय डॉ. रवि शंकर निम और डीसीपी ग्रेटर नोएडा-चार राजीव सिसोदिया की भूमिका की जांच कर रहे हैं।
बता दें, बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया था जीबीयू के छात्र को नोटिस जारी करने के मामले में ग्रेटर नोएडा के कार्यपालक मजिस्ट्रेट को निलंबित कर दिया गया है।
इसके बाद इंटरनेट मीडिया प्रसारित होने लगा कि एसीपी ग्रेटर नोएडा- तृतीय डॉ. रवि शंकर निम को निलंबित कर दिया गया है। पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
जिले में निलंबन शासन स्तर पर होता है
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, ईकोटेक-वन कोतवाली एसीपी-तृतीय डॉ. रवि शंकर निम के सर्किल में आती है। इसी कोतवाली में तैनात दारोगा शिवा पांडेय ने छात्र के खिलाफ आख्या तैयार की थी। जबकि कार्यपालक मजिस्ट्रेट तृतीय का चार्ज एसीपी ग्रेटर नोएडा-चार राजीव सिसोदिया के पास है।

