June 6, 2026

हरियाणा में डिजिटल जनगणना शुरू, अब घर बैठे ऑनलाइन भर सकेंगे जानकारी

Chandigarh/Alive News: हरियाणा में जनगणना को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल जनगणना शुरू कर दी गई है। इसका शुभारंभ मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने किया। अब इस प्रक्रिया में मोबाइल ऐप और टैबलेट के जरिए सीधे ऑनलाइन डेटा दर्ज किया जाएगा।

इस बार लोगों को सेल्फ एन्यूमरेशन (Self Enumeration) की सुविधा भी दी गई है। यानी लोग घर बैठे वेब पोर्टल पर अपनी जानकारी खुद भर सकते हैं। यह सुविधा पूरी तरह वैकल्पिक है। जो लोग खुद जानकारी नहीं भरेंगे, उनके घर सरकारी कर्मचारी आकर जानकारी इकट्ठा करेंगे। ऑनलाइन फॉर्म भरने वालों का डेटा भी बाद में वेरिफाई किया जाएगा।

इन सवालों का जवाब देने की जरूरत नहीं:
अगर कोई कर्मचारी इन चीजों के बारे में पूछे, तो जवाब देना जरूरी नहीं है:

  • आपकी आमदनी या बैंक बैलेंस
  • आधार, पैन या अन्य दस्तावेज दिखाने का दबाव
  • बैंक अकाउंट नंबर या OTP

कुछ जरूरी नियम:

  • लंबे समय से साथ रह रहे लिव-इन कपल को विवाहित माना जाएगा।
  • मोबाइल में FM होने पर उसे ‘रेडियो’ माना जाएगा, लेकिन मोबाइल पर यूट्यूब देखने को ‘टीवी’ नहीं माना जाएगा।
  • घर में अलग रसोई होने पर ही उसे किचन माना जाएगा।
  • अगर घर में नल है, लेकिन आप बोतल का पानी इस्तेमाल करते हैं, तो ‘बॉटल्ड वाटर’ दर्ज होगा।

डिजिटल मैपिंग से होंगे फायदे:
हर घर को डिजिटल मैप में ‘डिजी डॉट’ के रूप में दर्ज किया जाएगा, जिससे कई फायदे होंगे:

  • आपदा के समय सही और तेज राहत पहुंचाने में मदद
  • चुनावी क्षेत्रों (परिसीमन) के निर्धारण में आसानी
  • शहरों की बेहतर प्लानिंग (सड़क, स्कूल, अस्पताल)
  • पलायन और शहरीकरण का सही डेटा मिलेगा
  • वोटर लिस्ट में डुप्लीकेट नाम हटाने में मदद

जनगणना से जुड़े जरूरी सवाल-जवाब:

  • जनगणना में लोगों की उम्र, शिक्षा, रोजगार और घर की जानकारी ली जाएगी।
  • किराएदार की भी गिनती उसी जगह होगी, जहां वह रह रहा है।
  • जनगणना में सहयोग करना जरूरी है, यह कानूनी प्रक्रिया है।
  • मोबाइल नंबर या आधार देना जरूरी नहीं है, लेकिन देना सुविधाजनक हो सकता है।
  • गलत जानकारी देना कानूनन गलत है।
  • इंटरनेट न होने पर भी डेटा ऑफलाइन सेव हो जाएगा और बाद में अपलोड हो जाएगा।
  • बुजुर्ग या अनपढ़ लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं, कर्मचारी खुद आकर जानकारी दर्ज करेंगे।

सरकार का कहना है कि इस डिजिटल प्रक्रिया से डेटा ज्यादा सटीक होगा और भविष्य में विकास योजनाएं बेहतर तरीके से बनाई जा सकेंगी, जिससे आम लोगों को सीधा फायदा मिलेगा।