Dambulla : भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी ने एक बार फिर अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। महज 15 साल की उम्र में उन्होंने 50 ओवर क्रिकेट का नया विश्व रिकॉर्ड बनाते हुए सिर्फ 11 गेंदों में अर्धशतक जड़ दिया। उनकी 29 गेंदों पर 94 रन की तूफानी पारी की बदौलत इंडिया-ए ने ट्राई सीरीज के फाइनल में श्रीलंका-ए को 66 रन से हराकर खिताब अपने नाम कर लिया।
दांबुला में खेले गए फाइनल मुकाबले में श्रीलंका-ए ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया, लेकिन भारत-ए के बल्लेबाजों ने शुरू से ही आक्रामक तेवर दिखाए। वैभव सूर्यवंशी ने मैदान के चारों ओर आकर्षक शॉट लगाते हुए सिर्फ 29 गेंदों में 94 रन बनाए, जिसमें 10 चौके और 8 गगनचुंबी छक्के शामिल रहे। उनकी पारी ने मैच का रुख पूरी तरह भारत की ओर मोड़ दिया।
कप्तान तिलक वर्मा ने 67 रन की जिम्मेदार पारी खेली, जबकि ऋतुराज गायकवाड़ ने 40 रन और अनुकूल रॉय ने 15 गेंदों पर 39 रन बनाकर टीम के स्कोर को 50 ओवर में 9 विकेट पर 377 रन तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
20 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा
वैभव सूर्यवंशी ने अपनी ऐतिहासिक पारी के दौरान 11 गेंदों में अर्धशतक पूरा कर 50 ओवर क्रिकेट में सबसे तेज फिफ्टी का नया विश्व रिकॉर्ड बना दिया। इससे पहले यह रिकॉर्ड श्रीलंका के कौशल्य वीररत्ने के नाम था, जिन्होंने 2006 में 12 गेंदों पर अर्धशतक लगाया था।
यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वैभव ने यह कारनामा अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिस्पर्धी टूर्नामेंट के फाइनल में किया। उनकी बल्लेबाजी में आत्मविश्वास, आक्रामकता और तकनीक का शानदार मिश्रण देखने को मिला।
श्रीलंका-ए की कोशिश रही नाकाम
378 रन के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंका-ए की शुरुआत लड़खड़ाती रही। टीम के लिए वनुजा सहान ने 62 रन और सदीरा समरविक्रमा ने 52 रन की पारी खेलकर संघर्ष किया, लेकिन अन्य बल्लेबाज बड़ी साझेदारी नहीं कर सके। पूरी टीम 47.1 ओवर में 311 रन पर सिमट गई। भारत-ए की ओर से यश ठाकुर और विप्रज निगम ने तीन-तीन विकेट लेकर जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उतार-चढ़ाव के बाद शानदार वापसी
ट्राई सीरीज में भारत-ए का अभियान आसान नहीं रहा। टीम को बीच टूर्नामेंट में अफगानिस्तान-ए और श्रीलंका-ए के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि, निर्णायक मुकाबलों में टीम ने शानदार वापसी की और फाइनल में दमदार प्रदर्शन कर चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।
वैभव सूर्यवंशी की रिकॉर्डतोड़ पारी ने न केवल भारत-ए को ट्रॉफी दिलाई, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि भारतीय क्रिकेट को भविष्य के लिए एक और बड़ा सितारा मिल चुका है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैभव इसी तरह प्रदर्शन करते रहे तो आने वाले वर्षों में वे भारतीय क्रिकेट की सबसे बड़ी पहचान बन सकते हैं।

