Shamli/Ayodhya/Alive News : ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे के दौरान लिए गए एक फैसले की सराहना की है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर दान विवाद की जांच के बीच संबंधित व्यक्तियों को सरकारी बैठकों से दूर रखना एक उचित कदम है।
शामली में मीडिया से बातचीत करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि जिस व्यक्ति पर आरोप लगे हों, उसे जांच पूरी होने तक प्रमुख बैठकों से अलग रखना बेहतर संदेश देता है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा अपनाए गए रुख को “बहुत अच्छा कदम” बताया।
क्या है राम मंदिर दान विवाद?
हाल के दिनों में अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में दान राशि और वित्तीय प्रबंधन को लेकर आरोप सामने आए हैं। इन आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। खास बात यह है कि ट्रस्ट ने भी निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए जांच का समर्थन किया है।
रिपोर्टों के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे के दौरान ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को बैठक से दूर रखने और उनके स्थान पर प्रतिनिधि भेजने की व्यवस्था की गई थी।
SIT कर रही जांच
राज्य सरकार द्वारा गठित SIT दान पेटियों, वित्तीय रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित अधिकारियों से पूछताछ कर रही है। जांच के तहत चंपत राय सहित अन्य पदाधिकारियों से भी सवाल-जवाब किए गए हैं।
पहले रहे थे योगी सरकार के आलोचक
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पिछले कुछ महीनों में गोसंरक्षण और अन्य मुद्दों को लेकर योगी सरकार की आलोचना करते रहे हैं। ऐसे में अयोध्या दान विवाद पर मुख्यमंत्री के रुख का उनका समर्थन राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
नोट: दान राशि में अनियमितताओं के आरोपों की जांच जारी है। अभी तक किसी भी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

