October 18, 2026

टीईटी की अनिवार्यता से छूट की मांग, शिक्षकों ने केंद्र सरकार से कानूनी संशोधन की उठाई मांग

Faridabad/Alive News: लंबे समय से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे शिक्षकों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता को लेकर अपनी नौकरी और भविष्य की सुरक्षा पर चिंता जताई है। वर्ष 2009 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट देने की मांग को लेकर टीईटी विरोधी शिक्षक संघर्ष समिति पलवल और हरियाणा प्राइमरी टीचर एसोसिएशन फरीदाबाद के सदस्यों ने केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर को ज्ञापन सौंपा। शिक्षकों ने केंद्र सरकार से इस मामले में कानूनी संशोधन कर राहत देने की मांग की।

लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के हितों का मुद्दा उठाया

हरियाणा प्राइमरी टीचर एसोसिएशन के जिला प्रधान चतर सिंह ने बताया कि शिक्षकों की नियुक्ति उस समय लागू भर्ती नियमों और निर्धारित योग्यताओं के आधार पर हुई थी। वरिष्ठ शिक्षक नेता भारत दहिया ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के फैसले के बाद पहले से नियुक्त शिक्षकों के सामने टीईटी की अनिवार्यता को लेकर चिंता बढ़ी है। उनके अनुसार, इससे देश के करीब 25 लाख और हरियाणा के लगभग 30 हजार शिक्षकों के हित प्रभावित हो सकते हैं।

संसद में कानूनी संशोधन की मांग

शिक्षकों ने मांग की कि आरटीई अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट देने के लिए आवश्यक वैधानिक संशोधन किया जाए। उनका कहना है कि नियुक्ति के समय निर्धारित योग्यताओं के आधार पर सेवा में आए शिक्षकों के लंबे सेवाकाल और सेवा अधिकारों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने शिक्षकों की समस्याएं सुनीं और उनकी मांगों को केंद्र व हरियाणा सरकार के समक्ष रखने के लिए पैरवी करने का आश्वासन दिया। इस दौरान हरकिशन तंवर, जयपाल डागर, ब्रह्मदेव चौहान, सुशील तेवतिया और महाबीर भड़ाना सहित बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे।