New Delhi/Alive News: हवाई टिकटों की बढ़ती कीमतों, डायनैमिक प्राइसिंग और निजी एयरलाइंस द्वारा लिए जाने वाले अतिरिक्त शुल्कों के मामले में सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा। मामला जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच के समक्ष सूचीबद्ध है।
इस मामले में पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एयरलाइंस की कार्यप्रणाली पर सख्त टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था कि नियमों को जल्द लागू और प्रकाशित किया जाना चाहिए। साथ ही टिप्पणी की थी कि यदि एयरलाइंस नियमों का पालन नहीं करती हैं तो उनके विमानों को जमीन पर खड़ा करने जैसी कार्रवाई पर भी विचार किया जा सकता है।
केंद्र सरकार ने 17 अगस्त को अदालत को बताया था कि हवाई किराए और यात्रियों से जुड़े नए नियमों को तीन सप्ताह के भीतर अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था मामला
हवाई किराए में अचानक बढ़ोतरी और यात्रियों से लिए जाने वाले अतिरिक्त तथा कथित हिडन चार्ज का मामला नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था।
सोशल एक्टिविस्ट एस. लक्ष्मीनारायणन ने याचिका दायर कर सिविल एविएशन सेक्टर में अधिक पारदर्शिता और यात्रियों के हितों की सुरक्षा के लिए मजबूत और स्वतंत्र नियामक व्यवस्था बनाने की मांग की थी।
याचिका में निजी एयरलाइंस द्वारा हवाई किराए में बड़े उतार-चढ़ाव और अलग-अलग अतिरिक्त शुल्कों को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट गाइडलाइंस बनाने की भी मांग की गई है।
याचिका में उठाए गए प्रमुख मुद्दे
याचिकाकर्ता ने एयरलाइंस की बैगेज पॉलिसी और अतिरिक्त शुल्कों को लेकर कई सवाल उठाए हैं।
1. फ्री चेक-इन बैगेज की सीमा कम करने का मुद्दा
याचिका के अनुसार, कई निजी एयरलाइंस ने इकोनॉमी क्लास यात्रियों के लिए मुफ्त चेक-इन बैगेज की सीमा पहले की तुलना में कम कर दी है। इसे यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ाने वाला कदम बताया गया है।
2. केवल एक बैग की अनुमति पर सवाल
नई बैगेज नीतियों में चेक-इन के लिए बैगों की संख्या सीमित करने और अतिरिक्त सामान पर अलग शुल्क लेने का मुद्दा भी उठाया गया है।
याचिका में यह भी सवाल उठाया गया है कि जो यात्री चेक-इन बैगेज सुविधा का इस्तेमाल नहीं करते, उन्हें टिकट कीमत में कोई विशेष छूट क्यों नहीं मिलती।
3. हवाई किराए की अधिकतम सीमा तय करने की मांग
याचिका में कहा गया है कि वर्तमान व्यवस्था में सामान्य उड़ानों के लिए हर टिकट का अधिकतम किराया तय करने का कोई व्यापक सिस्टम नहीं है।
इसी वजह से मांग बढ़ने पर टिकटों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। याचिकाकर्ता ने इस व्यवस्था की समीक्षा और यात्रियों को राहत देने के लिए नियम बनाने की मांग की है।
4. हिडन चार्ज और अतिरिक्त शुल्क का मामला
याचिका में आरोप लगाया गया है कि अलग-अलग सेवाओं और शुल्कों के कारण यात्रियों को टिकट की वास्तविक लागत पहले से स्पष्ट नहीं होती।
बैगेज, सीट चयन, भोजन, टिकट कैंसिलेशन और टिकट बदलने जैसी सेवाओं के लिए अलग-अलग शुल्क लिए जा सकते हैं। इन शुल्कों और शर्तों को लेकर अधिक पारदर्शिता की मांग की गई है।
त्योहारों में हवाई टिकट महंगे क्यों हो जाते हैं?
त्योहारों और छुट्टियों के दौरान यात्रियों की संख्या बढ़ जाती है। एयरलाइंस आमतौर पर डायनैमिक प्राइसिंग सिस्टम का इस्तेमाल करती हैं जैसे-जैसे सस्ती श्रेणी की सीटें बिकती जाती हैं, बाकी सीटें अधिक कीमत वाली कैटेगरी में उपलब्ध होती हैं। इसी कारण एक ही फ्लाइट का टिकट अलग-अलग समय पर बुक करने वाले यात्रियों को अलग कीमत पर मिल सकता है।
क्या एयरलाइंस मनमाने तरीके से किराया बढ़ा सकती हैं?
सामान्य बाजार आधारित उड़ानों में टिकट की कीमत मुख्य रूप से मांग और सीटों की उपलब्धता के आधार पर बदलती है। हालांकि एयरलाइंस को लागू नियमों और नागरिक उड्डयन से जुड़े नियमों का पालन करना होता है।
कुछ सरकारी योजनाओं, जैसे UDAN, में किराए को लेकर विशेष नियम और सीमाएं तय की जाती हैं।
सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई का मुख्य मुद्दा यही है कि यात्रियों को अचानक और बहुत अधिक बढ़े हुए किराए से किस तरह सुरक्षा दी जाए।
एक ही फ्लाइट में यात्रियों का किराया अलग-अलग क्यों होता है?
एयरलाइंस एक ही फ्लाइट की सीटों को अलग-अलग फेयर कैटेगरी में बेचती हैं।
जो यात्री पहले टिकट बुक करते हैं, उन्हें अपेक्षाकृत सस्ता किराया मिल सकता है। बाद में सीटें कम होने और मांग बढ़ने पर उसी फ्लाइट के टिकट महंगे हो सकते हैं।
इसलिए एक ही विमान में यात्रा करने वाले दो यात्रियों द्वारा चुकाई गई टिकट कीमत अलग-अलग हो सकती है।
टिकट के अलावा कौन-कौन से शुल्क लग सकते हैं?
हवाई टिकट के अलावा यात्रियों को कुछ वैकल्पिक सेवाओं के लिए अलग शुल्क देना पड़ सकता है। इनमें शामिल हैं—
- अतिरिक्त बैगेज शुल्क,
- पसंदीदा सीट चुनने का शुल्क,
- भोजन और अन्य वैकल्पिक सेवाएं,
- टिकट बदलने का शुल्क,
- टिकट रद्द करने पर लगने वाला शुल्क।
इनकी राशि और शर्तें अलग-अलग एयरलाइंस की नीति के अनुसार अलग हो सकती हैं।
हवाई किराए पर सुप्रीम कोर्ट की पिछली अहम टिप्पणियां
फरवरी 2026 में कोर्ट ने जताई थी चिंता
फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने त्योहारों और आपात स्थिति के दौरान हवाई किराए में भारी बढ़ोतरी को गंभीर मुद्दा बताया था। अदालत ने केंद्र सरकार से इस मामले पर जवाब मांगा था। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया था कि यह मामला आम जनता के हितों से जुड़ा है और संबंधित विभाग इस पर विचार कर रहे हैं।
मई 2026 में अलग-अलग एयरलाइंस के किराए पर उठे सवाल
मई 2026 की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने एक ही दिन और एक ही रूट पर अलग-अलग एयरलाइंस के किराए में बड़े अंतर पर सवाल उठाए थे।
सुनवाई के दौरान उदाहरण दिया गया था कि एक एयरलाइन करीब 8 हजार रुपये का किराया ले रही है, जबकि दूसरी एयरलाइन उसी सेक्टर के लिए करीब 18 हजार रुपये वसूल रही है।
याचिकाकर्ता की ओर से दावा किया गया था कि कुछ परिस्थितियों में हवाई किराए में 300 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो जाती है।
अब सोमवार को होने वाली सुनवाई में केंद्र सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था और यात्रियों को हवाई किराए तथा अतिरिक्त शुल्कों से राहत देने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

