New Delhi/Alive News: लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनशन अब अस्पताल से भी जारी है। जंतर-मंतर पर 21 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे वांगचुक को शनिवार को दिल्ली पुलिस ने उनकी बिगड़ती तबीयत को देखते हुए सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। हालांकि, अस्पताल पहुंचने के बाद भी उन्होंने अपना अनशन जारी रखा है और दवा लेने से भी इनकार कर दिया है। डॉक्टरों की एक विशेषज्ञ टीम उनकी सेहत पर लगातार नजर रख रही है।
इस बीच वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर उन्हें किसी निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की मांग की है। उनका आरोप है कि पुलिस ने उनकी सहमति के बिना उन्हें जंतर-मंतर से हटाया और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया। वहीं, पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए की गई।
क्या भूख हड़ताल करना मौलिक अधिकार है?
भारत में भूख हड़ताल लंबे समय से शांतिपूर्ण विरोध का एक माध्यम रही है। सुप्रीम कोर्ट ने कई फैसलों में माना है कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(b) के तहत नागरिकों को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार है।
हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक स्थानों पर अनिश्चित समय तक कब्जा नहीं किया जा सकता और प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उचित कदम उठा सकता है।
क्या सरकार जबरन अनशन तुड़वा सकती है?
कानूनी रूप से किसी व्यक्ति को जबरन अपना अनशन समाप्त करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। यदि किसी अनशनकारी की हालत गंभीर हो जाती है, तो अदालत या प्रशासन उसकी जान बचाने के लिए उसे अस्पताल भेज सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं होता कि उसे अपना अनशन खत्म करना होगा।
किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के मामले में भी अदालत ने यही कहा था कि उन्हें अस्पताल ले जाया जाए, लेकिन उनका अनशन जारी रह सकता है।
क्या जबरदस्ती खाना खिलाया जा सकता है?
विश्व चिकित्सा संघ (World Medical Association) के माल्टा घोषणापत्र के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति पूरी समझदारी के साथ इलाज या भोजन लेने से इनकार करता है, तो उसकी इच्छा का सम्मान किया जाना चाहिए। सामान्य परिस्थितियों में डॉक्टर किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध जबरन भोजन या इलाज देने से बचते हैं।
हालांकि, ऐसे मामलों में अदालत परिस्थितियों और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए अलग-अलग निर्णय ले सकती है।

