Patna/Alive News: बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की नई कैबिनेट ने शपथ ले ली है। नई सरकार में कुल 32 मंत्रियों को शामिल किया गया है। मंत्रिमंडल के गठन से साफ संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले चुनाव में जातीय और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर रणनीति बनाई गई है।
नई कैबिनेट में सबसे ज्यादा जोर पिछड़ा वर्ग (OBC) और अति पिछड़ा वर्ग (EBC) पर दिया गया है। बीजेपी और जेडीयू दोनों दलों ने इन वर्गों के नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी देकर सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी खुद कोइरी समाज से आते हैं। वहीं डिप्टी सीएम पद पर भूमिहार और यादव समाज को प्रतिनिधित्व दिया गया है। राजनीतिक जानकार इसे बिहार की बड़ी जातीय राजनीति का हिस्सा मान रहे हैं।
बीजेपी ने अपनी तरफ से राम कृपाल यादव, केदार गुप्ता, रमा निषाद, दिलीप जायसवाल और प्रमोद चंद्रवंशी जैसे OBC और EBC नेताओं को मंत्री बनाया है। इसके अलावा सवर्ण समाज से विजय कुमार सिन्हा, मिथिलेश तिवारी और संजय टाइगर को भी कैबिनेट में जगह मिली है।
दलित समाज से लखेंद्र पासवान और नंद किशोर राम को मंत्री बनाया गया है। वहीं महिला प्रतिनिधित्व के तौर पर श्रेयसी सिंह को शामिल किए जाने की भी काफी चर्चा हो रही है।
जेडीयू की तरफ से सबसे ज्यादा चर्चा नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को लेकर है। उन्हें भी कैबिनेट में शामिल किया गया है। निशांत कुमार कुर्मी समाज से आते हैं, जिसे जेडीयू का मुख्य वोट बैंक माना जाता है।
इसके अलावा जेडीयू ने श्रवण कुमार, भगवान सिंह कुशवाहा, मदन सहनी और बिलो मंडल जैसे नेताओं को मंत्री बनाकर अलग-अलग सामाजिक वर्गों को साधने की कोशिश की है। दलित समाज से अशोक चौधरी, सुनील कुमार और रत्नेश सदा को भी कैबिनेट में जगह दी गई है।
सहयोगी दलों को भी सरकार में प्रतिनिधित्व दिया गया है। एलजेपी (रामविलास) से संजय पासवान और संजय सिंह को मंत्री बनाया गया है। वहीं हम पार्टी से संतोष मांझी को कैबिनेट में शामिल किया गया है। आरएलएम की तरफ से दीपक प्रकाश को मंत्री पद मिला है।
अब राजनीतिक नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सामाजिक संतुलन के आधार पर बनाई गई यह नई कैबिनेट आगामी चुनाव में कितना असर दिखा पाती है।

