New Delhi/Alive News: इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के चेयरमैन सैम पित्रोदा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, RSS प्रमुख मोहन भागवत और केंद्र सरकार पर कई मुद्दों को लेकर निशाना साधा। उन्होंने पीएम मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर कहा कि गरीबों, दलितों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की बात करना नक्सलवाद या कम्युनिज्म नहीं है।
न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में पित्रोदा ने कहा कि इंसानियत को सबसे ऊपर रखा जाना चाहिए और सभी इंसान एक ही जगह से आए हैं। उन्होंने मोहन भागवत के उस बयान पर भी सवाल उठाया, जिसमें भारत में मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध और यहूदी समुदायों के सम्मान की बात कही गई थी। पित्रोदा ने कहा कि इन समुदायों के लोगों से पूछना चाहिए कि वे आज भारत में कैसा महसूस करते हैं।
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त के अपने भाषण में कहा था कि देश से नक्सलवाद खत्म हो गया है, लेकिन ‘दिमागी नक्सल’ अभी भी मौजूद हैं।
2014 से पहले बनी संस्थाओं का मिल रहा फायदा- पित्रोदा
पित्रोदा ने देश की मौजूदा संस्थागत व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि आज दिखाई देने वाली कई सुविधाएं और संस्थान पिछले कई दशकों में तैयार किए गए हैं। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों से गलतियां हुई होंगी, लेकिन IIT और IIM जैसे संस्थानों समेत कई महत्वपूर्ण संस्थाएं उसी दौर में विकसित हुईं।
उन्होंने सवाल उठाया कि 2014 के बाद ऐसे कितने बड़े संस्थान बनाए गए हैं, जिनकी तुलना पहले की संस्थागत विरासत से की जा सके।
GDP बढ़ना ही काफी नहीं
भारत की 7.8 फीसदी GDP ग्रोथ पर पित्रोदा ने कहा कि केवल आर्थिक विकास दर बढ़ना पर्याप्त नहीं है। यह भी देखना जरूरी है कि आर्थिक विकास का फायदा समाज के किस वर्ग को मिल रहा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या विकास का लाभ आम लोगों तक पहुंच रहा है और क्या इसका फायदा सभी वर्गों को समान रूप से मिल रहा है।
राहुल गांधी को बताया मजबूत नेता
पित्रोदा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का समर्थन करते हुए उन्हें मजबूत नेता बताया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी में बौद्धिक क्षमता, दृढ़ता, साहस और अपने विचारों पर विश्वास है। उनके मुताबिक राहुल गांधी कांग्रेस की ‘आइडिया ऑफ इंडिया’ की सोच को सामने रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
संस्थाओं की स्वतंत्रता पर सरकार को घेरा
पित्रोदा ने केंद्र सरकार पर संस्थाओं की स्वतंत्रता कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय में सत्ता के ज्यादा केंद्रीकरण से लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता प्रभावित हुई है।
उन्होंने न्यायपालिका, चुनाव आयोग, प्रवर्तन निदेशालय (ED), आयकर विभाग और पुलिस जैसी संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि लोकतंत्र में स्वतंत्र संस्थाएं और मजबूत निगरानी तंत्र जरूरी हैं।
संसद के कामकाज पर भी जताई निराशा
संसद के मानसून सत्र को लेकर पित्रोदा ने कहा कि बहस का स्तर देखकर उन्हें निराशा होती है। उन्होंने कहा कि कई बार सांसद मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप और शोर करते नजर आते हैं।
उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के संसद में प्रदर्शन की तारीफ की। पित्रोदा के मुताबिक इस दौरान सरकार कई मुद्दों पर दबाव में दिखाई दी।

