June 26, 2026

राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: 8 आरोपियों के रिश्तों का खुलासा, कौन किससे है जुड़ा?

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आठ आरोपियों के आपसी रिश्तों का खुलासा

Ayodhya/Alive News: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले में एसआईटी की सिफारिश के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट ने आठ नामजद आरोपियों और कई अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। जांच में सामने आया है कि अधिकांश आरोपी आपस में रिश्तेदार हैं या फिर ट्रस्ट से जुड़े लोगों के करीबी हैं। सभी किसी न किसी रूप में चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया से जुड़े हुए थे।

मुख्य आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का ड्राइवर बताया गया है। आरोप है कि गणना कक्ष और दान पात्रों की चाबियां उसी के पास रहती थीं। वह दान की गिनती और व्यवस्था पर नजर रखता था और चोरी की पूरी साजिश में उसकी अहम भूमिका मानी जा रही है।

गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव पर आरोप है कि उसने चढ़ावे की गिनती के लिए लोगों की ड्यूटी लगाई और कई अन्य लोगों को इस कथित साजिश में शामिल किया। पूरी गणना प्रक्रिया उसकी निगरानी में होती थी।

रिश्तेदार भी आरोपी

जांच के अनुसार अनुकल्प मिश्रा ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा के रिश्तेदार हैं और आरोपी लवकुश मिश्रा के जीजा भी हैं। दोनों चढ़ावे की गिनती का काम करते थे। पुलिस ने दावा किया है कि इनके घरों से चोरी की रकम भी बरामद हुई है।

करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्र भी दान की गिनती में शामिल थे। आरोप है कि वे अनुकल्प और लवकुश के साथ मिलकर इस साजिश का हिस्सा थे।

मनीष यादव, मुख्य आरोपी टिन्नू यादव का भतीजा है और वह भी गिनती की प्रक्रिया में शामिल था। उसके पास से भी कथित तौर पर चोरी की रकम बरामद हुई है। वहीं अविनाश शुक्ला भी चढ़ावे की गिनती में ड्यूटी करता था। जांच में उसके बैंक खाते से लगभग पांच लाख रुपये मिलने का दावा किया गया है।

इस मामले में टिन्नू यादव समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस साजिश में शामिल अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं।

6 जून को सामने आया था मामला

राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला 6 जून को सामने आया था। इसके बाद ट्रस्ट ने आंतरिक जांच शुरू की। 13 जून को राज्य सरकार ने एसआईटी का गठन किया, जिसने 23 जून को अपनी रिपोर्ट सौंपते हुए एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की।

एफआईआर दर्ज होने में देरी पर सवाल उठने के बाद विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने तुरंत कार्रवाई की मांग की। इसके बाद 25 जून की शाम ट्रस्ट की ओर से रामजन्मभूमि थाने में मामला दर्ज कराया गया।

पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है। अदालत में आरोप सिद्ध होने तक सभी आरोपी कानून की नजर में निर्दोष माने जाते हैं।