New Delhi/Alive News: बंगलादेशी घुसपैठिये , SIR और हिंदू मुस्लमान , मियां और असमिया जैसे मुद्दों पर चली आ रही असम की शांत वादियों की राजनीती में ‘निजी चरित्र’ के हमलों का चुनावी तूफान आ चुका है! लेकिन यह तूफान विकास के मुद्दों पर नहीं, बल्कि ‘निजी चरित्र’ के हमलों पर है। कांग्रेस और भाजपा के बीच की यह जंग अब मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ चुकी है। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री की पत्नी के पासपोर्ट पर सवाल उठाए हैं, तो मुख्यमंत्री ने सीधे कांग्रेस के ‘देशभक्ति’ पर प्रहार किया है।
असम के इस चुनावी रण में राहुल गांधी, पवन खेड़ा और हिमंता बिस्वा सरमा के बीच शब्दों के ‘खूनी बाण’ चल रहे हैं।
‘पासपोर्ट अटैक’विवाद की शुरुआत हुई कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से, जिसने गुवाहाटी से दिल्ली तक हड़कंप मचा दिया। खेड़ा ने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी, रिनिकी भुइयां सरमा पर संगीन आरोप लगाते हुए खेड़ा ने कहा की “रिनिकी सरमा के पास तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट हैं—UAE, मिस्र, और एंटीगुआ!
क्या मुख्यमंत्री बताएंगे कि क्या उनकी पत्नी अब भी भारतीय नागरिक हैं?
खेड़ा ने दुबई और अमेरिका के व्योमिंग (Wyoming) में बेनामी संपत्तियों का दावा करते हुए इसे एक ‘अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार’ करार दिया ही था की इधर, राहुल गांधी ने भी मोर्चा संभालते हुए मुख्यमंत्री को सीधे ‘हिंदुस्तान का सबसे भ्रष्ट CM’ करार दे दिया। राहुल ने रैली में हुंकार भरते हुए कहा कि अब माफी से काम नहीं चलेगा।
“असम को भाजपा ने ‘लैंड ATM’ बना रखा है। हिमंता जी, आप कुछ भी कर लें, जैसे ही कांग्रेस की सरकार आएगी, आपको 10 से 15 साल के लिए जेल जाना होगा। हम आपके और आपके परिवार के हर भ्रष्टाचार की जांच कराएंगे।”
राहुल और पवन के प्रतिघात पर हिमंता बिस्वा सरमा ने ‘प्रलयंकारी’ पलटवार करते हुए जो जवाब दिया, उसने सियासी भूचाल ला दिया। CM असम ने कांग्रेस के आरोपों को ‘पाकिस्तानी साजिश’ से जोड़ दिया। हिमंता ने कहा: “पवन खेड़ा को जो डेटा दिया है, वह पाकिस्तानी सोशल मीडिया ग्रुप्स से आया है। कांग्रेस को जिताने के लिए पाकिस्तान में टीवी शो चल रहे हैं। यह देश के खिलाफ अपराध है!
“चुनौती देते हुए CM असम ने कहा की “मुझे गिरफ्तार करने के लिए इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और राहुल गांधी को सात बार पुनर्जन्म लेना पड़ेगा! पवन खेड़ा ने मेरी पत्नी पर जो कीचड़ उछाला है, उसके लिए उन्हें 48 घंटे के भीतर मानहानि के मुकदमों का सामना करना पड़ेगा।
9 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले असम की राजनीति ‘कीचड़ उछालने’ के खेल में बदल गई है। एक तरफ भ्रष्टाचार और पासपोर्ट के आरोप हैं, तो दूसरी तरफ राष्ट्रवाद और पाकिस्तानी साजिश के दावे। जनता देख रही है कि विकास के वादे पीछे छूट गए हैं और अब लड़ाई सिर्फ ‘बदले’ की रह गई है।

