June 6, 2026

राम नवमी पर सतवस्तु ग्रंथ के संदेश के साथ परमार्थ अपनाने का किया आह्वान

Faridabad/Alive News: आज शुक्रवार को राम नवमी के उपलक्ष्य में आयोजित एक आध्यात्मिक कार्यक्रम में सतवस्तु के कुदरती ग्रंथ के आधार पर मानव जीवन के उत्थान हेतु विशेष संदेश दिया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने वर्तमान कलियुग के परिवर्तनशील समय की ओर संकेत करते हुए बताया कि एक ऐसा युग आने वाला है जब संसार से रोग, शोक और असत्य का अंत होकर सुख, शांति और उजियारा स्थापित होगा।

कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत भजनों और वचनों में कहा गया कि जब कलुकाल समाप्ति की ओर बढ़ेगा, तब जगत में प्रेम, सच्चाई और एकता का विस्तार होगा। लोगों को यह संदेश दिया गया कि वे भिन्न-भेद और स्वार्थपूर्ण प्रवृत्तियों को त्यागकर प्रेम और सत्य के मार्ग को अपनाएं।

वक्ताओं ने विशेष रूप से श्री विष्णु भगवान का उल्लेख करते हुए कहा कि आत्मज्ञान के माध्यम से ही जीव अपने वास्तविक स्वरूप को पहचान सकता है। उन्होंने “मैं-तूं” के भेद को समाप्त कर हर व्यक्ति में एक ही परम तत्व को देखने की प्रेरणा दी।

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि परमार्थ ही सर्वोच्च सत्य है, जिसे अपनाकर मनुष्य आत्मतोष, शांति और निर्विकारता की अवस्था प्राप्त कर सकता है। इस स्थिति में व्यक्ति गृहस्थ जीवन जीते हुए भी जगत से निर्लेप रहकर समाज के कल्याण के कार्य कर सकता है।

आयोजकों ने उपस्थित जनसमूह से आग्रह किया कि वे स्वार्थपरता त्यागकर आत्मज्ञान और परोपकार के मार्ग पर अग्रसर हों। साथ ही, सतयुग दर्शन वसुंधरा द्वारा संचालित आत्मिक ज्ञान की निःशुल्क कक्षाओं से ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से जुड़ने का भी आह्वान किया गया।

कार्यक्रम के समापन पर “मैं तूं दे विच फरक मत जानो, अपने हृदय विच रामनाम ही मानो” संदेश के साथ सभी को एकता, समभाव और आध्यात्मिक जीवन अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।