Faridabad/Alive News: मानसून के दौरान यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने से हर साल हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बीच सीमा विवाद की स्थिति बन जाती थी, जिससे किसानों को भारी असमंजस का सामना करना पड़ता था। कई बार यह विवाद झगड़ों और हिंसक घटनाओं तक पहुंच जाता था। अब इस लंबे समय से चली आ रही समस्या के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं।
दोनों राज्यों के लोक निर्माण विभाग द्वारा अंतरराज्यीय सीमा पर लगभग 300 सीमेंटेड पिलर लगाने का कार्य अंतिम चरण में है। कुछ स्थानों पर नदी के अधिक जलस्तर के कारण पिलर स्थापित नहीं हो सके हैं। इन स्थानों पर पहले पानी निकालकर निर्माण कार्य पूरा किया जाएगा।
इन पिलरों की ऊंचाई करीब 70 फुट रखी जा रही है, ताकि वे दूर से भी स्पष्ट दिखाई दे सकें। विशेष बात यह है कि इनका आधार बेहद मजबूत बनाया जा रहा है, जिससे तेज बहाव के बावजूद इन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
गौरतलब है कि 1970 के दशक में भी सीमा निर्धारण के लिए पिलर लगाए गए थे, लेकिन वे नदी के तेज बहाव में बह गए थे। इसके बाद हर वर्ष जलधारा बदलने से कभी हरियाणा की जमीन उत्तर प्रदेश की ओर और कभी उत्तर प्रदेश की जमीन हरियाणा की ओर खिसक जाती थी, जिससे खेती और कब्जे को लेकर विवाद उत्पन्न होते रहे।
इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा सर्वेक्षण किया गया, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर अब नए पिलर स्थापित किए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, फरीदाबाद जिले में यमुना नदी लगभग 25 किलोमीटर तक बहती है और इसके किनारे हरियाणा व उत्तर प्रदेश के 50 से अधिक गांव स्थित हैं। नए पिलर जमीन के करीब 50 फुट नीचे और 20 फुट ऊपर तक बनाए जा रहे हैं, जिससे उनकी मजबूती सुनिश्चित हो सके।
लोक निर्माण विभाग के एसडीओ रामप्रकाश ने बताया कि अब केवल कुछ ही पिलर लगाने का कार्य शेष है। खास बात यह है कि करीब 150 पिलर उत्तर प्रदेश के लोक निर्माण विभाग द्वारा लगाए गए हैं, और यह पूरा कार्य दोनों राज्यों की आपसी सहमति से किया जा रहा है।
प्रशासन को उम्मीद है कि इस पहल के बाद वर्षों पुराना सीमा विवाद समाप्त हो जाएगा और किसानों को राहत मिलेगी।

