August 30, 2026

नेपाल बाढ़: लोगों को 7:30 बजे ही खतरे की खबर, डेढ़ घंटे बाद आया अलर्ट; चीन पर चेतावनी न देने का आरोप

नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद त्रिशूली बाजार में तबाही का दृश्य

International/Alive News: नेपाल में 26 अगस्त की सुबह आई भीषण बाढ़ के बाद अब राहत और बचाव कार्य के साथ-साथ समय पर चेतावनी जारी नहीं किए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि उन्हें सुबह करीब 7:30 बजे ही बाढ़ के खतरे की जानकारी मिल गई थी, जबकि आधिकारिक SMS अलर्ट इसके काफी देर बाद भेजा गया।

नेपाल के मौसम विभाग के अनुसार, चीन की ओर से रसुवा जिला प्रशासन को बाढ़ की सूचना सुबह करीब 9 बजे मिली। इसके बाद नदी के दोनों किनारों पर रहने वाले लोगों को SMS अलर्ट भेजा गया। वहीं, नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय का कहना है कि उसे जिला प्रशासन से सुबह 8:40 बजे ही बाढ़ की जानकारी मिल गई थी।

दूसरी ओर, स्थानीय लोगों के मुताबिक, उन्हें दोस्तों और रिश्तेदारों के जरिए सुबह 7:30 बजे ही खतरे की सूचना मिल गई थी। इससे यह सवाल उठ रहा है कि प्रशासनिक अलर्ट इतनी देर से क्यों जारी किया गया।

बाढ़ से 691 लोगों की मौत, हजारों लापता

शनिवार तक नेपाल में बाढ़ से मरने वालों की संख्या 691 पहुंच गई है। तीन हजार से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 275 भारतीय भी शामिल हैं। अब तक 7,514 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू किया जा चुका है। इनमें 163 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। राहत और बचाव अभियान अभी जारी है।

लोगों को सुबह 7:30 बजे ही मिल गई थी सूचना

त्रिशूली के रहने वाले 36 वर्षीय रमेश रिजाल ने बताया कि चीन सीमा के पास रहने वाले उनके एक दोस्त ने सुबह करीब 7:30 बजे फोन करके भयानक बाढ़ आने की जानकारी दी थी। हालांकि, उन्होंने उस समय इसे गंभीरता से नहीं लिया और बच्चों को स्कूल भेजने की तैयारी करते रहे।

रिजाल ने सुबह 9:20 बजे अपने नए घर के निर्माण का वीडियो भी बनाया था। इसके कुछ ही समय बाद हालात तेजी से बिगड़ने लगे और वह परिवार के साथ सुरक्षित स्थान की ओर चले गए।

स्कूल की घंटी बजाकर बच्चों को किया गया अलर्ट

त्रिभुवन सेकेंडरी को-एजुकेशनल स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी ने बताया कि एक कर्मचारी को नदी के ऊपरी इलाके से बाढ़ आने की जानकारी मिली थी। इसके बाद उन्होंने स्कूल की घंटी लगातार बजाने का निर्देश दिया।

स्कूल में करीब 1,600 छात्र पढ़ते हैं। प्रिंसिपल के मुताबिक, उनकी आंखों के सामने स्कूल का बड़ा हिस्सा बाढ़ में बह गया। हालांकि, सभी बच्चों को सुरक्षित निकाल लिया गया। बाद में उन्हें हेलिकॉप्टर की मदद से रेस्क्यू किया गया।

भूकंप जैसे झटकों के बाद बंद हुआ नदी का डेटा सिस्टम

मौसम विभाग के अनुसार, 26 अगस्त की सुबह 8:37 बजे नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 4.4 तीव्रता के भूकंप जैसे झटके महसूस किए गए थे। इसके करीब 13 मिनट बाद सुबह 8:50 बजे भोटेकोशी नदी का जलस्तर मापने वाला डेटा रिसीविंग सिस्टम काम करना बंद कर गया।

इसके बाद तिब्बत की ल्हेंदे खोला नदी में पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा बर्फ और चट्टानों के साथ नीचे गिरा। ल्हेंदे खोला, भोटेकोशी नदी की सहायक नदी है। भोटेकोशी नदी चीन से निकलकर नेपाल में प्रवेश करती है।

दो मिनट में बदल गया त्रिशूली बाजार का पूरा मंजर

त्रिशूली बाजार में कबाड़ का कारोबार करने वाले बिहार निवासी जलेश्वर साहनी ने बाढ़ के दौरान कई तस्वीरें खींचीं। उन्होंने बताया कि सुबह करीब 9:15 बजे रासुवागढ़ी में रहने वाले उनके भाई ने फोन करके विशाल बाढ़ की जानकारी दी।

इसके बाद साहनी अपने परिवार के साथ पहाड़ी की ओर चले गए। उन्होंने सुबह 9:36 बजे एक तस्वीर ली, जिसमें बाढ़ का पानी त्रिशूली बाजार की ओर तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा था।

इसके महज दो मिनट बाद 9:38 बजे ली गई तस्वीर में बाजार का बड़ा हिस्सा बाढ़ के पानी में बह चुका था। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बाढ़ कितनी तेजी से आगे बढ़ी।

चीन पर समय पर चेतावनी नहीं देने का आरोप

नेपाल में विपक्ष ने भी समय पर चेतावनी जारी नहीं किए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं। नेपाली कांग्रेस के उपनेता अभिषेक प्रताप शाह ने कहा कि चीन का सैटेलाइट सिस्टम ग्लेशियर और पहाड़ी क्षेत्रों की निगरानी करता है। ऐसे में उनका आरोप है कि खतरे की जानकारी नेपाल को समय रहते दी जानी चाहिए थी।

हालांकि, इस पूरे मामले में यह सवाल अभी भी बना हुआ है कि बाढ़ का खतरा सामने आने के बावजूद स्थानीय प्रशासन और आम लोगों तक चेतावनी समय पर क्यों नहीं पहुंच पाई। अब राहत और बचाव अभियान के साथ-साथ बाढ़ की पूर्व चेतावनी व्यवस्था की भी समीक्षा की जा रही है।