August 30, 2026

चित्रकूट में क्यों आई भीषण बाढ़? 3 बड़ी वजहें, रामघाट डूबा; 23 साल में सबसे ज्यादा बारिश

चित्रकूट में भीषण बाढ़ के बाद रामघाट और आसपास के इलाकों में भरा पानी

chitrakoot/Alive News: उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में लगातार करीब 18 घंटे हुई मूसलाधार बारिश के बाद हालात बेहद खराब हो गए हैं। मंदाकिनी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने से शहर के कई हिस्सों में पानी घुस गया है। रामघाट समेत कई घाट और निचले इलाकों में बाढ़ का पानी भर गया है। बताया जा रहा है कि बारिश ने पिछले 23 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।

चित्रकूट में अचानक आई भीषण बाढ़ के पीछे मुख्य रूप से लगातार भारी बारिश, पहाड़ी क्षेत्रों से तेजी से आया पानी और बांधों के टूटने से पानी का सैलाब बताया जा रहा है। हालात को देखते हुए प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है।

18 घंटे तक हुई मूसलाधार बारिश

चित्रकूट और आसपास के इलाकों में लगातार 18 घंटे से ज्यादा समय तक भारी बारिश हुई। इससे पहाड़ी नालों और कैचमेंट क्षेत्रों का पानी तेजी से नीचे की ओर आया। इसके साथ ही मंदाकिनी नदी का जलस्तर भी लगातार बढ़ता गया।

तेजी से बढ़ते जलस्तर के कारण कई इलाकों में अचानक पानी भर गया। लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए प्रशासन और राहत दलों ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।

बाढ़ की 3 बड़ी वजहें

1. पहाड़ी इलाकों से आया पानी:
विंध्य क्षेत्र के पहाड़ी कैचमेंट एरिया और चित्रकूट के आसपास लगातार बारिश होने से नालों और छोटी धाराओं में पानी बढ़ गया। यह पानी तेजी से नीचे आया और निचले इलाकों में जमा होने लगा।

2. गोरगी और डोडा बांध से पानी का सैलाब:
मध्य प्रदेश के सतना जिले में गोरगी बांध टूटने और मानिकपुर तहसील क्षेत्र में डोडा बांध का बड़ा हिस्सा ढहने की बात सामने आई है। इससे बड़ी मात्रा में पानी तेजी से रिहायशी इलाकों की ओर पहुंचा। पहले से उफन रही मंदाकिनी नदी के कारण स्थिति और गंभीर हो गई।

3. मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ना:
लगातार बारिश और बांधों से आए पानी के कारण मंदाकिनी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा। नदी के खतरे के निशान से काफी ऊपर बहने के कारण आसपास के इलाकों में बाढ़ का पानी फैल गया।

हेलिकॉप्टर और नावों से रेस्क्यू

बाढ़ के बाद प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। कई जगह सड़कों पर नावों की मदद से लोगों को बाहर निकाला जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक, करीब 650 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। एसडीआरएफ की टीम रात में भी रेस्क्यू अभियान चला रही है। गंभीर रूप से प्रभावित इलाकों में हेलिकॉप्टर की मदद भी ली जा रही है।

रामघाट समेत कई इलाके पानी में डूबे

बाढ़ का असर चित्रकूट के कई धार्मिक और रिहायशी इलाकों में दिखाई दे रहा है। रामघाट पूरी तरह पानी में डूब गया है। तुलसीपीठ (कांच मंदिर), दीनदयाल शोध संस्थान परिसर, आरोग्यधाम, सियाराम कुटीर और जानकीकुंड आश्रम भी पानी से घिरे हुए हैं।

सीतापुर, तरौंहा, बहादुरपुर और गोबरिया जैसे निचले इलाकों में कई घरों में 5 से 7 फीट तक पानी भरने की बात सामने आई है। कई लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों की छतों पर शरण लेने को मजबूर हैं।

23 साल में सबसे ज्यादा बारिश

चित्रकूट में हुई भारी बारिश ने पिछले 23 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। पिछले 18 घंटे में करीब 150 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, यह पिछले 23 वर्षों में चित्रकूट में हुई सबसे ज्यादा बारिश बताई जा रही है।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे बाढ़ प्रभावित और निचले इलाकों में जाने से बचें और सुरक्षित स्थानों पर रहें। अगले 24 घंटे में भी भारी बारिश की संभावना को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।