September 19, 2026

ट्रम्प के 100% टैरिफ वाले बिल से भारत पर दबाव बढ़ने की आशंका, रूस से तेल खरीदने पर पड़ सकता है असर

डोनाल्ड ट्रम्प और रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 100% टैरिफ लगने की आशंका

International/Alive News: अमेरिका और रूस के बीच जारी तनाव के बीच भारत के लिए व्यापार से जुड़ी नई चुनौती सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने से जुड़े विधेयक पर हस्ताक्षर किए हैं, ऐसा दी गई खबर में दावा किया गया है। इसके तहत भारत पर भी 100% तक टैरिफ लगाए जाने की आशंका जताई गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने बुधवार को इस विधेयक को 262 वोट के समर्थन और 159 वोट के विरोध से पारित किया था। इससे पहले सीनेट में इसे 86-11 वोट से मंजूरी मिली थी।

विधेयक का नाम ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ बताया गया है। इसमें रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने और रूस के ऊर्जा व रक्षा कारोबार पर प्रतिबंध लगाने के प्रावधान शामिल होने का दावा किया गया है।

भारत समेत पांच देशों पर टैरिफ का खतरा

खबर के अनुसार, रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदने वाले पांच देशों में चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान का नाम शामिल है। भारत अपनी जरूरत का 40% से अधिक कच्चा तेल रूस से आयात कर रहा है।

बताया गया है कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि हर 180 दिन में संबंधित देशों की सूची की समीक्षा करेंगे। भारत के विदेश मंत्रालय ने पहले कहा था कि देश अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा।

रूस से भारत का तेल आयात कैसे बढ़ा?

रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई। युद्ध से पहले भारत रूस से सीमित मात्रा में तेल खरीदता था, लेकिन बाद में रूस भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हो गया।

खबर में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, भारत रूस से रोजाना करीब 16 से 20 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदता रहा है। फिलहाल भारत की कुल तेल जरूरत का 40% से ज्यादा हिस्सा रूस से आने का दावा किया गया है।

रूस के अलावा इन देशों से भी खरीदता है भारत तेल

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत पूरी करने के लिए रूस के अलावा कई देशों पर निर्भर है। इनमें इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत और कतर प्रमुख हैं।

इसके अतिरिक्त भारत नाइजीरिया, अंगोला, ब्राजील और अमेरिका से भी कच्चा तेल आयात करता है। रूस से तेल की खरीद कम होने की स्थिति में इन देशों से आयात बढ़ाने की संभावना पर विचार करना पड़ सकता है।

भारत पर 100% टैरिफ का क्या असर हो सकता है?

अगर भारत पर 100% टैरिफ लगाया जाता है, तो अमेरिका में भारतीय सामान की कीमत बढ़ सकती है। इससे अमेरिकी खरीदार दूसरे देशों के उत्पादों की ओर रुख कर सकते हैं।

ऐसी स्थिति में भारत के टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, इंजीनियरिंग सामान, चमड़ा, समुद्री उत्पाद और केमिकल उद्योगों के निर्यात पर दबाव पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक असर टैरिफ के लागू होने की शर्तों, दायरे और भारत को मिलने वाली किसी संभावित छूट पर निर्भर करेगा।

रूस से तेल खरीदना कम किया तो बढ़ सकती है लागत

अगर भारत को अमेरिकी प्रतिबंधों या टैरिफ के दबाव में रूस से तेल खरीदना कम करना पड़ता है, तो उसे दूसरे देशों से अधिक तेल खरीदना पड़ सकता है।

वैकल्पिक स्रोतों से मिलने वाले तेल की कीमत, परिवहन खर्च और उपलब्धता के आधार पर भारत की आयात लागत बढ़ सकती है। इसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी पड़ सकता है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि आयात लागत बढ़ने का पूरा असर तुरंत उपभोक्ताओं तक पहुंचे।

रूस के ऊर्जा और रक्षा कारोबार पर भी कार्रवाई का प्रस्ताव

रिपोर्ट के अनुसार, विधेयक में रूस के ऊर्जा उद्योग, वित्तीय संस्थानों और रक्षा क्षेत्र से जुड़े कारोबार पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है।

इसके अलावा, उन टैंकरों पर भी कार्रवाई का प्रावधान बताया गया है, जो मौजूदा प्रतिबंधों से बचकर दूसरे देशों तक रूसी तेल पहुंचाते हैं। ऐसे टैंकरों के नेटवर्क को ‘शैडो फ्लीट’ कहा जाता है।

अमेरिका पहले भी रूस के तेल कारोबार पर प्रतिबंध लगा चुका है। हालांकि, वैश्विक तेल आपूर्ति में बाधाओं और ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता के चलते कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी छूट भी दी गई थी।

ईरान के साथ व्यापार करने वाली कंपनियों पर भी बढ़ सकता है दबाव

खबर के मुताबिक, विधेयक में 1996 के ईरान प्रतिबंध कानून को 2031 तक बढ़ाने का प्रावधान भी है। यह कानून ईरान के साथ व्यापार करने वाली कुछ गैर-अमेरिकी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने की अनुमति देता है।

इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से जुड़े सामान पर 500% तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिए जाने की बात भी कही गई है। बताया गया है कि यह अधिकार पांच साल तक लागू रह सकता है।

कुछ यूरोपीय देशों को मिल सकती है छूट

रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस से प्राकृतिक गैस खरीदने वाले कुछ देशों पर भी प्रस्तावित प्रतिबंधों का असर पड़ सकता है। हालांकि, रूस की गैस पर निर्भरता कम करने वाले कुछ यूरोपीय देशों को छूट दिए जाने का प्रावधान बताया गया है।

डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल के हवाले से कहा गया है कि इस विधेयक का उद्देश्य यूरोपीय सहयोगियों को निशाना बनाना नहीं, बल्कि रूस के तेल कारोबार को आर्थिक समर्थन देने वाले देशों पर दबाव बढ़ाना है।

कुल मिलाकर, इस विधेयक से भारत के सामने रूस से तेल आयात और अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती बढ़ सकती है। इसका वास्तविक असर कानून के अंतिम प्रावधानों और भारत पर लागू होने वाली शर्तों पर निर्भर करेगा।