जन विश्वास बिल 2026 संसद में हुआ पास सार्वजनिक स्थान पर बच्चे की शरारत और रात में संदिग्ध मिलने पर नहीं होगी जेल
New DelhiAlive News : केंद्र सरकार ने जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, 2026 को संसद से मंजूरी मिलने के साथ ही दिल्ली पुलिस अधिनियम 1978 की दो प्रमुख धाराओं को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है। अब इन धाराओं के तहत न तो जेल की सजा होगी और न ही कोई जुर्माना देना होगा।
संसद में पारित हुए इस विधेयक का उद्देश्य उन पुराने और छोटे कानूनों को हटाना है, जो वर्तमान समय में अप्रासंगिक हो चुके थे या जिनके कारण आम जनता को बेवजह कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता था।
बच्चों की ‘अशिष्टता’ पर नहीं लगेगा जुर्माना
संशोधन के तहत दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा 95 को पूरी तरह हटा दिया गया है। इस धारा के अनुसार, यदि सात साल से कम उम्र का कोई बच्चा सार्वजनिक स्थान पर कोई ‘न्यूसेंस’ (अशिष्टता या उपद्रव) करता था, तो उसके अभिभावकों पर 100 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान था। अब इस पुराने कानून को खत्म कर दिया गया है।
रात में घर के बाहर मिलने पर नहीं होगी जेल
एक और बड़ा बदलाव धारा 102 (सी) में किया गया है। अब तक इस धारा के तहत यदि कोई व्यक्ति सूर्यास्त और सूर्योदय के बीच किसी वाहन या इमारत में बिना किसी संतोषजनक स्पष्टीकरण के पाया जाता था, तो उसे तीन महीने तक की जेल हो सकती थी। पुलिस अक्सर संदिग्धों के खिलाफ इस धारा का उपयोग करती थी, लेकिन अब इस प्रावधान को भी कानून की किताब से हटा दिया गया है।
खास बातें और बदलाव के कारण
ईज आफ लिविंग: मामूली गलतियों के लिए जेल भेजने के डर को खत्म किया गया।
अदालतों का बोझ : छोटे मामलों के हटने से कोर्ट और पुलिस का कीमती समय बचेगा।
पुराने कानून: कई कानून दशकों पुराने थे जिनकी आज के समय में कोई प्रासंगिकता नहीं थी।
“जन विश्वास बिल के माध्यम से सरकार का लक्ष्य छोटे प्रशासनिक अपराधों को डिक्रिमिनलाइज (गैर-आपराधिक) करना है, ताकि नागरिक अनावश्यक कानूनी उत्पीड़न से बच सकें।”

