Faridabad/Alive News: डीएवी शताब्दी महाविद्यालय, फरीदाबाद के संस्कृत विभाग और भारतीय ज्ञान परंपरा (आईकेएस) प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में संस्कृत सप्ताह समारोह के तहत ‘विकसित भारत @2047 एवं संस्कृत’ विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम 25 से 31 अगस्त 2026 तक चल रहे संस्कृत सप्ताह के अंतर्गत आयोजित हुआ।
महाविद्यालय के आईक्यूएसी में हुए कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पं. जवाहरलाल नेहरू आदर्श राजकीय महाविद्यालय, फरीदाबाद के संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. जोरावर सिंह रहे। व्याख्यान में करीब 50 विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। कार्यक्रम महाविद्यालय के कार्यकारी प्राचार्य डॉ. नरेंद्र कुमार के निर्देशन में आयोजित किया गया। भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ की समन्वयिका डॉ. रुचि मल्होत्रा और संस्कृत सप्ताह के संयोजक डॉ. अमित शर्मा ने कार्यक्रम का संयोजन किया।
डॉ. जोरावर सिंह ने कहा कि विकसित भारत @2047 का लक्ष्य केवल आर्थिक और तकनीकी विकास तक सीमित नहीं है। विकसित भारत के लिए ज्ञान, संस्कार, नैतिकता, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक चेतना से मजबूत समाज का निर्माण भी जरूरी है। इसमें संस्कृत भाषा और भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
उन्होंने कहा कि संस्कृत भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की प्रमुख भाषा रही है। वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत, भगवद्गीता, आयुर्वेद, योग, दर्शन, व्याकरण, गणित और ज्योतिष जैसे विषयों से जुड़े कई महत्वपूर्ण ग्रंथ संस्कृत में उपलब्ध हैं। इनमें मानव जीवन और समाज से संबंधित व्यापक ज्ञान मौजूद है।
उन्होंने कहा कि इस ज्ञान को आधुनिक शिक्षा, विज्ञान, तकनीक और अनुसंधान के साथ जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत है। इससे भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक संदर्भ में उपयोगी बनाया जा सकता है।
डॉ. सिंह ने विद्यार्थियों से संस्कृत को केवल एक विषय या प्राचीन भाषा के रूप में नहीं देखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संस्कृत ज्ञान-विज्ञान की समृद्ध परंपरा को समझने का माध्यम भी है। इसके अध्ययन से विद्यार्थियों में तार्किक सोच, अनुशासन, मूल्यबोध, रचनात्मकता और अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान की भावना विकसित हो सकती है।
कार्यक्रम में डॉ. जितेंद्र ढुल, डॉ. रुचि मल्होत्रा, डॉ. मीनाक्षी हुड्डा, प्रमोद कुमार, डॉ. योगेश शर्मा, नेत्रपाल, उत्तमा पांडेय, माया और रविन्द्र कौर सहित कई प्राध्यापक मौजूद रहे। प्राध्यापकों ने विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की।
संस्कृत सप्ताह के तहत 31 अगस्त को विद्यार्थियों के लिए सूक्ति-लेखन प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों में संस्कृत भाषा, भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृत साहित्य के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ उनकी रचनात्मकता, चिंतन और अभिव्यक्ति क्षमता को प्रोत्साहित करना है।

