International/Alive News: ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई को उनकी मौत के करीब चार महीने बाद दफनाया जाएगा। उन्हें उनकी अंतिम इच्छा के अनुसार ईरान के धार्मिक शहर मशहद में इमाम रजा की दरगाह के पास सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के अनुसार, खामेनेई का अंतिम संस्कार 21 जून के आसपास हो सकता है। उनकी मौत 28 फरवरी को तेहरान में हुए अमेरिका और इजरायल के कथित हवाई हमलों में हुई थी। युद्ध जैसी स्थिति के कारण पहले तय किया गया अंतिम संस्कार कार्यक्रम टाल दिया गया था।
अधिकारियों का अनुमान है कि तेहरान, क़ुम और मशहद में होने वाले अंतिम संस्कार कार्यक्रमों में करीब 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं। लोगों को अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि देने के लिए तीन दिन का सार्वजनिक कार्यक्रम रखा जाएगा।
मुख्य अंतिम संस्कार समारोह तेहरान में आयोजित होगा, जो करीब 24 घंटे तक चल सकता है। इसके बाद खामनेई के पार्थिव शरीर को क़ुम और फिर मशहद ले जाया जाएगा। मशहद में इमाम रजा दरगाह परिसर के पास उन्हें दफनाया जाएगा।
तेहरान नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक, अंतिम यात्रा के दौरान पार्थिव शरीर को क़ुम और मशहद की सड़कों से भी ले जाया जाएगा। पूरे कार्यक्रम की जिम्मेदारी IRGC को सौंपी गई है।
अगर जनाजे में 2 करोड़ लोग शामिल होते हैं, तो यह ईरान के संस्थापक अयातुल्ला रूहोल्लाह खोमैनी के 1989 के अंतिम संस्कार से भी बड़ा आयोजन होगा। खोमैनी के जनाजे में करीब 1 करोड़ लोग पहुंचे थे। उस दौरान भारी भीड़ के कारण भगदड़ मच गई थी, जिसमें कई लोगों की मौत और हजारों लोग घायल हो गए थे।
अधिकारियों का कहना है कि इस बार सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। हालांकि युद्ध के बाद की स्थिति में इतना बड़ा आयोजन कराना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
इस्लामी परंपरा के अनुसार आमतौर पर किसी व्यक्ति को मौत के एक-दो दिन के भीतर दफनाया जाता है, लेकिन ईरानी अधिकारियों का कहना है कि युद्ध और भारी भीड़ की आशंका के कारण अंतिम संस्कार में देरी हुई।
मशहद ईरान का दूसरा सबसे बड़ा शहर और शिया मुसलमानों का प्रमुख धार्मिक केंद्र है। यहां स्थित इमाम रजा की दरगाह दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक स्थलों में गिनी जाती है, जहां हर साल करोड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर हमले किए थे। इन्हीं हमलों में तेहरान स्थित खामनेई के आवास और कार्यालय को भी निशाना बनाया गया था। हमले में ईरान के कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, सुरक्षा अधिकारी और परमाणु वैज्ञानिकों के मारे जाने की भी खबरें सामने आई थीं।

