June 6, 2026

आस्था,अनुष्ठान और अध्यात्म का अद्भुत संगम, दिव्यधाम में संपन्न हुआ 19वां ब्रह्मोत्सव

Faridabad/Alive News: सूरजकुंड मार्ग स्थित श्री लक्ष्मीनारायण दिव्य धाम-श्री सिद्धदाता आश्रम में आयोजित पांच दिवसीय 19वें ब्रह्मोत्सव का समापन गुरुवार को भव्य रथयात्रा, शोभायात्रा, संत समागम और श्री सुदर्शन नृसिंह महायज्ञ की महान पूर्णाहुति के साथ हुआ। श्री रामानुज संप्रदाय की परंपराओं और विधि-विधान से आयोजित इस महोत्सव में संत समागम, श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला।

श्री रामानुज संप्रदाय के तीर्थ पीठ इंद्रप्रस्थ एवं हरियाणा पीठाधीश्वर अनंत विभूषित श्रीमद जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज के सानिध्य में युवाचार्य स्वामी श्री अनिरुद्धाचार्य जी महाराज, विभिन्न पीठो के पीठाधीश्वर एवं दक्षिण भारत के आचार्यों ने श्री रामानुज संप्रदाय के विधिविधान से भगवान श्री लक्ष्मीनारायण का दिव्य महाभिषेक एवं दिव्य श्रंगार किया। आयोजित किए गए पांच दिवसीय श्री सुदर्शन नृसिंह महायज्ञ की महापूर्ण आहुति के साथ विश्व कल्याण और लोकमंगल की कामना की गई। ब्रह्मोत्सव के पांचवें दिन भगवान श्री लक्ष्मीनारायण की विशाल रथयात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। महिला श्रद्धालुओं ने कलश यात्रा निकाली, जबकि श्री रामानुज संप्रदाय की ध्वजपताकाओं के साथ शोभायात्रा ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। रथ पर भगवान श्री लक्ष्मीनारायण के साथ स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज विराजे और बैंड-बाजों, ढोल नागाड़ो की थाप पर यात्रा में श्रद्धालुगण झूमते रहे।आयोजन के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सुमधुर संगीतयमी भजनों से श्रद्धालुगण भाव विभोर हो गए।

संतों के सानिध्य में भक्ति और आस्था का संदेश
युवाचार्य स्वामी श्री अनिरुद्धाचार्य जी महाराज ने संत समाज की अगवानी की। शोभायात्रा के बाद आयोजित प्रवचन में स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था और समर्पण से ही उनके मनोरथ पूर्ण होते हैं। उन्होंने कहा कि श्री सिद्धदाता धाम आने वाला कोई भी श्रद्धालु खाली हाथ नहीं लौटता और यहां धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति संभव है।

सिद्धदाता धाम आने वालों को मुक्ति की चिंता नहीं’
स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने कहा कि सिद्धदाता आश्रम केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि सिद्धियों का धाम है। उन्होंने कहा कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को मुक्ति की चिंता नहीं करनी चाहिए, क्योंकि भगवान श्रीमन नारायण से यह वचनबद्धता जुड़ी हुई है।

संतों ने ब्रह्मोत्सव को बताया अद्वितीय आयोजन
संत समागम के दौरान वृंदावन से पधारे श्री श्री श्री 1008 स्वामी रामेश्वराचार्य जी महाराज ने कहा कि इतना विशाल और दिव्य ब्रह्मोत्सव सामान्य रूप से कहीं देखने को नहीं मिलता। यह भगवान, गुरु और भक्तों के भाव का परिणाम है। आरा (बिहार) से आए श्रीमद जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी ज्योति नारायणाचार्य जी ने कहा कि इस दिव्यधाम में आने वालों को सांसारिक सुख, समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है।  

उत्सव में वृन्दावन से आचार्य नरेश नारायण जी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए ने कहा कि  — “ब्रह्मोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि जीव का परमात्मा से मिलन का उत्सव है। यहाँ आकर जो दिव्य ऊर्जा महसूस हो रही है, वह पूज्य स्वामी श्री पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज के कठिन तप और सेवा का प्रतिफल है। ऐसे उत्सव हमारी आने वाली पीढ़ियों को सनातन संस्कारों से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं।”