November 4, 2026

50 लाख के डीजल खर्च की जांच का दायरा बढ़ा, सभी एंबुलेंस और पेट्रो कार्ड के रिकॉर्ड खंगालेगी टीम

Faridabad/Alive News: बीके अस्पताल की खड़ी एंबुलेंसों के नाम पर करीब 50 लाख रुपये का डीजल खर्च होने के मामले में अब स्वास्थ्य विभाग की सभी एंबुलेंस जांच के घेरे में आ गई हैं। स्वास्थ्य निदेशालय की ओर से गठित राज्य स्तरीय जांच कमेटी मंगलवार को फरीदाबाद पहुंची। टीम ने उपमुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रचना शर्मा, एंबुलेंस चालकों और संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ की। साथ ही एंबुलेंस संचालन, डीजल खर्च और रेफरल बुकिंग से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाले। बुधवार को भी जांच जारी रहेगी। इसके बाद कमेटी अपनी रिपोर्ट स्वास्थ्य निदेशालय को सौंपेगी।

सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान सामने आया है कि एक ही मोबाइल नंबर से कई बार रेफरल बुकिंग की गई। इनमें बल्लभगढ़ सरकारी अस्पताल से दिल्ली स्थित एम्स के लिए की गई बुकिंग भी शामिल है। जांच टीम को कुछ जरूरी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हो सके हैं। ऐसे में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से इस बारे में जवाब मांगा जा सकता है।

मरम्मत के लिए खड़ी एंबुलेंस के संचालन पर भी सवाल

जांच टीम मोहना और धौज स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचीं उन एंबुलेंस के मामले की भी पड़ताल कर सकती है, जो मरम्मत के लिए वाईएमसीए चौक के नजदीक स्थित एजेंसी में खड़ी थीं। टीम यह पता लगाएगी कि एजेंसी में खड़ी एंबुलेंस स्वास्थ्य केंद्रों तक कैसे पहुंचीं और उनके आने-जाने का रिकॉर्ड किस तरह दर्ज किया गया।

आठ एंबुलेंस के रिकॉर्ड की जांच की आशंका

मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की सभी एंबुलेंस का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। इस मामले में चार से अधिक एंबुलेंस शामिल हो सकती हैं। आठ एंबुलेंस के रिकॉर्ड की जांच किए जाने की आशंका है। इससे संबंधित कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय हो सकती है।

चार हजार रुपये तक होता है पेट्रो कार्ड रिचार्ज

सूत्रों के अनुसार, एंबुलेंस में डीजल भरवाने के लिए इस्तेमाल होने वाले पेट्रो कार्ड की लिमिट चार हजार रुपये निर्धारित है। कार्ड दोबारा रिचार्ज कराने के लिए संबंधित जानकारी ईमेल के माध्यम से स्वास्थ्य निदेशालय को भेजी जाती है। इसके बाद ही कार्ड रिचार्ज होता है। जांच कमेटी पेट्रो कार्ड के रिचार्ज रिकॉर्ड, डीजल खरीद और भुगतान की प्रक्रिया की भी पड़ताल कर सकती है।

फिलहाल स्वास्थ्य विभाग का कोई भी अधिकारी मामले में आधिकारिक बयान देने को तैयार नहीं है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही डीजल खर्च और एंबुलेंस संचालन में कथित अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।