Faridabad/Alive News: नवरात्र के आठवें दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन को महाष्टमी या दुर्गाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी की आराधना करने से भक्तों को सुख-समृद्धि, शांति और सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। नवरात्र के इस विशेष दिन पर मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। भक्त माता रानी के दर्शन कर परिवार की खुशहाली और जीवन में सुख-शांति की कामना करते हैं। कई घरों में इस अवसर पर कन्या पूजन भी किया जाता है।
श्वेत वस्त्र धारण करती हैं मां महागौरी
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी का स्वरूप अत्यंत शांत, सौम्य और गौर वर्ण का है। माता को श्वेत वस्त्र और आभूषण धारण किए हुए दर्शाया जाता है। उनका वाहन वृषभ यानी बैल है। मां की चार भुजाएं हैं। उनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में डमरू है, जबकि अन्य दो हाथ अभय और वरद मुद्रा में माने जाते हैं। मां महागौरी को पवित्रता, शांति और करुणा का प्रतीक माना जाता है। भक्त उनकी पूजा कर जीवन से नकारात्मकता दूर करने और मन में सकारात्मक विचार बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं।
कन्या पूजन का है विशेष महत्व
अष्टमी के दिन घरों और मंदिरों में कन्या पूजन की परंपरा है। इसमें छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है। उन्हें भोजन कराया जाता है और श्रद्धानुसार उपहार व दक्षिणा दी जाती है। कई परिवार इस दिन हलवा, पूरी और चने का प्रसाद तैयार करते हैं। हालांकि, कुछ परिवार नवमी के दिन भी कन्या पूजन करते हैं। यह परंपरा श्रद्धा, सम्मान और नारी शक्ति के महत्व का संदेश देती है।
पूजा के दौरान रखें स्वच्छता का ध्यान
अष्टमी पर भक्त सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और मां महागौरी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर पूजा करते हैं। माता को फूल, फल और मिठाई अर्पित की जाती है। श्रद्धालु दुर्गा चालीसा और मंत्रों का पाठ कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। पूजा के दौरान स्वच्छता बनाए रखना और श्रद्धापूर्वक धार्मिक परंपराओं का पालन करना महत्वपूर्ण माना जाता है।
नवरात्र का आठवां दिन शक्ति की आराधना के साथ-साथ परिवार और समाज में प्रेम, सम्मान तथा सकारात्मकता बनाए रखने का संदेश भी देता है।

