मां को दूध और खीर का भोग लगाने की मान्यता, पूजा में लाल-पीले फूल अर्पित कर श्रद्धालु करेंगे प्रार्थना
Faridabad/Alive News: शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की विधि-विधान से पूजा करने से भय और नकारात्मकता दूर होती है तथा जीवन में सुख-शांति और साहस का संचार होता है। नवरात्र के इस दिन मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालु मां के दर्शन करने पहुंचते हैं। भक्त मां को फूल, फल और मिठाई अर्पित कर परिवार की खुशहाली और समृद्धि की कामना करते हैं।
ऐसे करें मां चंद्रघंटा की पूजा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्र के तीसरे दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद पूजा स्थल की सफाई करनी चाहिए। इसके बाद मां चंद्रघंटा की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर पूजा का संकल्प लें। मां को लाल या पीले फूल, अक्षत, रोली और फल अर्पित करें। इसके बाद धूप-दीप जलाकर मां के मंत्रों का जाप करें और दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। अंत में मां की आरती कर परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।
दूध और खीर का भोग लगाने की मान्यता
मां चंद्रघंटा को दूध और दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाने की मान्यता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार खीर, फल और अन्य सात्विक प्रसाद अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यताओं में मां चंद्रघंटा को साहस, शक्ति और शांति का प्रतीक माना गया है। उनकी पूजा से भक्तों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा मिलती है। श्रद्धालु इस दिन मां से परिवार की सुख-शांति और देश-प्रदेश की समृद्धि की कामना करते हैं।

