New Delhi/Digital Desk: नेपाल में बाढ़ और जापान व वेनेजुएला में आए भूकंपों के बाद प्राकृतिक आपदाओं को लेकर दुनिया भर में चर्चा तेज है। इसी बीच टेस्ला और स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क की एक सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में है। मस्क ने भविष्य में पृथ्वी के बढ़ते तापमान और संभावित बड़े जलवायु संकट को लेकर चेतावनी दी है।
मस्क का कहना है कि केवल टिकाऊ ऊर्जा अपनाना ही पृथ्वी को लंबे समय के जलवायु खतरों से बचाने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता। उन्होंने भविष्य में अंतरिक्ष आधारित तकनीक और बड़े पैमाने पर जियो-इंजीनियरिंग के इस्तेमाल की संभावना का भी जिक्र किया है।
मस्क ने क्या कहा?
मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि बेहद गंभीर विलुप्ति की घटनाएं लंबे अंतराल के बाद होती रही हैं और केवल सस्टेनेबल एनर्जी पर निर्भर रहना भविष्य के सभी खतरों का समाधान नहीं है। उन्होंने पृथ्वी के तापमान को नियंत्रित करने के लिए अंतरिक्ष में बड़े स्तर पर सैटेलाइट सिस्टम विकसित करने की संभावना बताई।
मस्क के अनुसार, चंद्रमा से मास ड्राइवर्स के जरिए पृथ्वी-सूर्य लैग्रेंज पॉइंट्स तक भेजे गए विशेष सैटेलाइट भविष्य में पृथ्वी तक पहुंचने वाली सौर ऊर्जा को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। उनके मुताबिक, ऐसी तकनीक का इस्तेमाल लंबे समय तक ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव को नियंत्रित करने में किया जा सकता है।
‘हमारे पास लगभग 50 साल हैं’ वाली बात का मतलब क्या?
मस्क ने अपनी पोस्ट में कहा कि अगर लोग मौजूदा समुद्र तटों के आसपास ही रहना चाहते हैं तो जलवायु संबंधी तकनीकों पर तेजी से काम करना होगा। उन्होंने करीब 50 साल की समय-सीमा का उल्लेख किया। हालांकि, इसे वैज्ञानिक रूप से स्थापित भविष्यवाणी या यह दावा कि 50 साल बाद दुनिया खत्म हो जाएगी, के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
मस्क का बयान भविष्य में संभावित जलवायु चुनौतियों और उनसे निपटने के लिए अंतरिक्ष आधारित तकनीक की एक परिकल्पना है। पृथ्वी के जलवायु संकट की वास्तविक गंभीरता का आकलन वैज्ञानिक अध्ययनों और जलवायु विशेषज्ञों के निष्कर्षों के आधार पर किया जाता है।
जलवायु रिसर्च और फंडिंग भी चर्चा में
मस्क की यह टिप्पणी ऐसे समय सामने आई है जब अमेरिका में जलवायु अनुसंधान और उसकी फंडिंग को लेकर बहस चल रही है। आर्कटिक में तेजी से हो रहे बदलावों की निगरानी और वैज्ञानिक शोध को लेकर भी नीतिगत फैसलों पर चर्चा जारी है।
कुल मिलाकर, मस्क की चेतावनी का केंद्र दुनिया के 50 साल में खत्म होने का दावा नहीं, बल्कि भविष्य में बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए नई तकनीकों की जरूरत पर जोर है।

