Noida/Alive News: जिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड जांच के लिए लंबी तारीख मिलने के बाद भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि जांच के लिए जरूरी दस्तावेजों की जानकारी पहले से नहीं दी जाती। ऐसे में महिलाएं जांच वाले दिन घंटों लाइन में लगने के बाद जब रजिस्ट्रेशन काउंटर तक पहुंचती हैं तो दस्तावेज अधूरे बताकर उनका रजिस्ट्रेशन नहीं किया जाता और उन्हें दोबारा आने के लिए कह दिया जाता है।
दिल्ली निवासी नौ माह की गर्भवती कोमल ने बताया कि वह डॉक्टर की ओर से दी गई तारीख पर अल्ट्रासाउंड कराने जिला अस्पताल पहुंचीं। तीसरी मंजिल स्थित रजिस्ट्रेशन काउंटर पर उन्होंने पहले अपने दस्तावेज दिखाकर अल्ट्रासाउंड हो जाएगा के बारे में पूछा तो उन्हें लाइन में लगने के लिए कहा गया। करीब दो घंटे इंतजार के बाद जब उनकी बारी आई तो डॉक्टर ने आधार कार्ड की फोटोकॉपी मांगी। कोमल का कहना है कि यदि पहले ही इसकी जानकारी दे दी जाती तो उन्हें दो घंटे लाइन में नहीं लगना पड़ता। उन्होंने आरोप लगाया कि फोटोकॉपी नहीं होने पर उन्हें बाहर से अल्ट्रासाउंड कराने के लिए कहा गया और यह भी कहा गया कि दस्तावेजों की जानकारी देना उनका काम नहीं है।
इससे पहले ब्लड टेस्ट के दौरान भी उन्हें निर्धारित समय पर जांच नहीं मिली थी। उनके अनुसार डॉक्टर ने दोपहर दो बजे ब्लड टेस्ट करने की बात कही थी, लेकिन काफी देर तक कोई नहीं आया। काफी समय तक बहस करने के बाद ही उनका ब्लड टेस्ट किया गया। अस्पताल में मरीजों का समय और परेशानी दोनों बढ़ रहे हैं।
वहीं, तीन माह की गर्भवती सारिका ने बताया कि उन्हें अल्ट्रासाउंड के लिए एक महीने बाद की तारीख दी गई थी। तय तारीख पर वह सुबह आठ बजे अस्पताल पहुंचीं और करीब चार घंटे तक रजिस्ट्रेशन के लिए लाइन में लगी रहीं। बारी आने पर उन्हें बताया गया कि आधार कार्ड के अलावा अन्य दस्तावेज भी जरूरी हैं। सारिका का कहना है कि यदि यह जानकारी जब तारिख मिलती है तब ही दे दी जाती तो उन्हें बेवजह घंटों इंतजार नहीं करना पड़ता। उन्होंने आरोप लगाया कि फोटोकॉपी के बारे में पूछने पर महिला गार्ड ने उन्हें लाइन से बाहर निकालकर अस्पताल से बाहर जाने को कह दिया गया। उन्होंने कहा कि उनकी ही तरह कई गर्भवती महिलाओं को वापस भेज दिया गया।

