New Delhi/Alive News: नाबालिग से रेप के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने उनकी याचिका पर राजस्थान सरकार को नोटिस जारी करते हुए मामले पर जवाब मांगा है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बिना राज्य सरकार का पक्ष सुने अंतरिम जमानत पर फैसला नहीं लिया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति गंभीर होती है और जान को खतरा पैदा होता है, तो अंतरिम जमानत की मांग पर जल्द सुनवाई की जा सकती है। फिलहाल उनका इलाज जारी रहेगा और मामले की अगली सुनवाई अदालत की छुट्टियों के बाद होगी।
राजस्थान सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि 2 जून को आसाराम को अस्पताल ले जाकर चिकित्सकीय जांच कराई गई थी। जांच में उनकी जान को तत्काल कोई खतरा नहीं पाया गया। इसी आधार पर सरकार ने फिलहाल अंतरिम जमानत की आवश्यकता नहीं बताई।
यह मामला वर्ष 2013 में दो नाबालिग लड़कियों से रेप के आरोपों से जुड़ा है। राजस्थान हाई कोर्ट ने मई 2026 में दिए अपने फैसले में सह-आरोपियों को बरी कर दिया था, जबकि आसाराम को रेप के आरोप में दोषी मानते हुए निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा बरकरार रखी थी। हालांकि, हाई कोर्ट ने उन्हें गैंगरेप और POCSO Act की कुछ धाराओं से बरी कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान आसाराम के वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल की उम्र 90 वर्ष है और उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया में चल रही चर्चाओं का असर मामले पर पड़ा है।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि आसाराम एक प्रभावशाली व्यक्ति रहे हैं, इसलिए जमानत पर फैसला करते समय इस पहलू को भी ध्यान में रखना होगा। अदालत ने कहा कि फिलहाल अंतरिम जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता और राज्य सरकार का पक्ष सुनने के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।

