New Delhi/Alive News: मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा सिविल अस्पताल से सामने आए एक मामले ने सभी को भावुक कर दिया है। 19 महीने के मासूम विनय की आंखों की रोशनी चली जाने के बाद उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। बच्चे के परिजनों ने इलाज के दौरान चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाया है। वहीं, यह मामला सामने आने के बाद देशभर से सामाजिक संगठन, ट्रस्ट और आम लोग विनय की मदद के लिए आगे आए हैं।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में इलाज के दौरान बच्चे की आंखों में आई ड्रॉप डालने की बजाय गलती से नाक में इस्तेमाल होने वाली ड्रॉप डाल दी गई। उनका कहना है कि इसके बाद बच्चे की आंखों की हालत लगातार बिगड़ती गई और आखिरकार उसकी रोशनी चली गई। परिवार का कहना है कि 19 महीने का विनय अभी अपने माता-पिता को ठीक से पहचानना भी नहीं सीख पाया था, लेकिन इस घटना ने उसकी जिंदगी में अंधेरा ला दिया।
मामला मीडिया में आने के बाद मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने जांच के आदेश दिए। मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया, जिसमें भोपाल से एक विशेषज्ञ सर्जन को भी शामिल किया गया। जांच टीम ने बंडा पहुंचकर बच्चे का परीक्षण किया और अपनी रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को सौंप दी।
हालांकि, जांच रिपोर्ट आने के बाद विवाद और बढ़ गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. गंगा प्रसाद आर्य के अनुसार, विशेषज्ञों की टीम का मानना है कि बच्चे की आंखों की रोशनी नोजल ड्रॉप की वजह से नहीं गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि विनय गंभीर कुपोषण से पीड़ित था और इसी कारण उसकी आंखों की रोशनी प्रभावित हुई।
जांच रिपोर्ट पर परिजनों ने सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग अपने डॉक्टर की लापरवाही को छिपाने की कोशिश कर रहा है। परिवार का कहना है कि यदि बच्चा पहले से गंभीर स्थिति में था, तो उसे समय रहते किसी बड़े अस्पताल में रेफर क्यों नहीं किया गया। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
इस घटना के बाद देशभर से कई सामाजिक संगठन, ट्रस्ट और सेवा संस्थाएं विनय के इलाज में सहयोग के लिए आगे आई हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि बच्चे का इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में कराया जा रहा है और उसकी आंखों की रोशनी वापस आने की संभावना बनी हुई है। परिवार को भी उम्मीद है कि बेहतर इलाज से विनय फिर से दुनिया देख सकेगा।
फिलहाल इस मामले की जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बच्चे की आंखों की रोशनी जाने के पीछे वास्तविक कारण क्या था और किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही हुई थी या नहीं।

