June 30, 2026

पत्नी ज्यादा कमाती है, तो भत्ता क्यों? हाई कोर्ट

कर्नाटक हाई कोर्ट ने कमाऊ पत्नी को अंतरिम गुजारा भत्ता देने का आदेश रद्द किया

Karnataka/Alive News: कर्नाटक हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि पत्नी आर्थिक रूप से सक्षम है और अपनी जरूरतों का खर्च खुद उठा सकती है, तो केवल पत्नी होने के आधार पर उसे पति से गुजारा भत्ता (मेंटेनेंस) नहीं दिया जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि फैमिली कोर्ट को ऐसे मामलों में दोनों पक्षों की वास्तविक आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखकर ही फैसला करना चाहिए।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस चिल्लकुर सुमलता ने कहा कि अदालतों को इस धारणा से प्रभावित नहीं होना चाहिए कि हर मामले में पत्नी को पति से ही गुजारा भत्ता मिलना चाहिए। यदि पत्नी की आय पति के बराबर या उससे अधिक है और उस पर बच्चों की देखभाल जैसी अतिरिक्त जिम्मेदारी भी नहीं है, तो मेंटेनेंस देने का आदेश उचित नहीं माना जा सकता।

यह टिप्पणी उस मामले की सुनवाई के दौरान की गई, जिसमें ट्रायल कोर्ट ने एक व्यक्ति को अपनी अलग रह रही पत्नी को अंतरिम गुजारा भत्ते के रूप में 20 हजार रुपये प्रति माह देने का आदेश दिया था। पति ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि उसकी मासिक आय करीब 60 हजार रुपये है, जबकि उसकी पत्नी हर महीने 1 लाख रुपये से अधिक कमाती है।

सुनवाई के दौरान पत्नी ने कहा कि उसे शादी से जुड़े कुछ कर्ज चुकाने हैं, इसलिए उसे आर्थिक सहायता की जरूरत है। हालांकि, अदालत ने पाया कि उसने अपने हलफनामे में कर्ज, बकाया राशि या ईएमआई से जुड़े कोई दस्तावेज या स्पष्ट जानकारी प्रस्तुत नहीं की।

इन तथ्यों को देखते हुए हाई कोर्ट ने माना कि ट्रायल कोर्ट ने पत्नी की आय पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया था। अदालत ने कहा कि जब पत्नी आर्थिक रूप से सक्षम है और अपना खर्च स्वयं उठा सकती है, तो पति को हर महीने 20 हजार रुपये देने का आदेश उचित नहीं है। इसी आधार पर अंतरिम गुजारा भत्ते का आदेश रद्द कर दिया गया।

हालांकि, हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह फैसला केवल अंतरिम गुजारा भत्ते के आदेश तक सीमित है। इससे मुख्य मामले की सुनवाई या भविष्य में परिस्थितियां बदलने पर दायर की जाने वाली किसी नई अंतरिम गुजारा भत्ता याचिका पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।